कमल बेलों में घिरा कपिल सरोवर, केवल चौथाई जलभाग बचा, वर्षों से उपेक्षित तपोभूमि की पुकार, सरकारें बदली, मंत्री बदले पर हाल वही..! पढ़े खबर..

Editor बीकानेर

कमल बेलों में घिरा कपिल सरोवर, केवल चौथाई जलभाग बचा, वर्षों से उपेक्षित तपोभूमि की पुकार, सरकारें बदली, मंत्री बदले पर हाल वही..! पढ़े खबर..

पत्रकार नारायण उपाध्याय की स्पेशल रिपोर्ट
दैनिक खबरां,बीकानेर/कोलायत।कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व नजदीक है। जिले की धार्मिक नगरी कोलायत एक बार फिर देश-प्रदेश के श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी में जुटी है। हर वर्ष की तरह इस बार भी कपिल सरोवर में आस्था का मेला सजेगा, श्रद्धालु स्नान करेंगे, दीपदान होगा, धार्मिक अनुष्ठान होंगे। लेकिन,इन सबके बीच एक कड़वी सच्चाई यह है कि महर्षि कपिल मुनि की यह तपोभूमि अब अपनी मूल पहचान बचाने के संघर्ष में है।

कपिल सरोवर, जो कभी निर्मल जल और शांति का प्रतीक हुआ करता था, आज कमल की बेलों से लगभग पूरी तरह ढक चुका है। सरोवर का करीब तीन-चौथाई हिस्सा बेलों और खरपतवार से पटा हुआ है, केवल एक छोटा-सा भाग ही अब स्नान योग्य बचा है। यह समस्या कोई एक-दो साल की नहीं, बल्कि कई वर्षों से चली आ रही है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि इस दिशा में कोई ठोस कदम आज तक नहीं उठाया गया।

सरकारें बदलीं, मंत्री बदले… पर सरोवर की सूरत नहीं बदली!
यह बात और भी हैरान करने वाली है कि जिस कोलायत क्षेत्र से कई बार मंत्री तक बने, उसी क्षेत्र के इस ऐतिहासिक सरोवर की दशा पर किसी ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।
क्षेत्र के वरिष्ठ नेता देवीसिंह भाटी ने अपने कार्यकाल में कई बार सरोवर के कायाकल्प की पहल की, योजनाएँ भी बनीं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात। बाद में भंवरसिंह भाटी जब पिछली कांग्रेस सरकार में इसी कोलायत से विधायक बनकर मंत्री बने, तब लोगों को उम्मीद जगी कि अब शायद कपिल सरोवर का उद्धार होगा। मगर अफसोस, वो उम्मीदें भी कमल बेलों में उलझकर रह गईं।

अब निगाहें युवा विधायक अंशुमान सिंह भाटी पर
वर्तमान में कोलायत विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं अंशुमान सिंह भाटी, जिन्हें जनता ने युवाशक्ति, जोश और ईमानदार छवि के भरोसे बड़ी उम्मीदों के साथ चुना है। विधायक अंशुमान लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। सड़क से लेकर शिक्षा, रोजगार तक कई मोर्चों पर काम करते दिख रहे हैं। अब क्षेत्रवासियों की अपेक्षा है कि वे महर्षि कपिल मुनि की तपोभूमि को नया जीवन दें। क्योंकि जो भरोसा, जो उत्साह और जिस उमंग के साथ कोलायत की जनता ने उन्हें विधानसभा तक पहुँचाया, अब उसी भरोसे की असली परीक्षा है। कपिल सरोवर का उद्धार न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और पर्यावरण के लिहाज से भी कोलायत के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।

कमल बेलें बढ़ीं, मगर जिम्मेदारी नहीं जगी
सच भी है,कपिल सरोवर की सफाई और संरक्षण सिर्फ़ कागज़ी घोषणाओं में ही सीमित रह गया है।
हर बार प्रशासन सफाई अभियान की बातें करता है, मगर हर बार नतीजा वही रहता है। कुछ नावें चलती हैं, कुछ फोटो खिंचते हैं, फिर सब कुछ जस का तस।

अगले वर्ष की कार्तिक पूर्णिमा तक उम्मीद
इस बार की कार्तिक पूर्णिमा में तो शायद कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखेगा, लेकिन अगर आने वाले एक वर्ष में कपिल सरोवर का कायाकल्प कर दिया जाए, तो न केवल कोलायत का गौरव लौटेगा, बल्कि विधायक अंशुमान सिंह भाटी की छवि एक विकासशील और संवेदनशील जनप्रतिनिधि के रूप में और भी निखरेगी। वैसे भी कोलायत की जनता सरल, श्रद्धालु और अपने जनप्रतिनिधि के प्रति समर्पित मानी जाती है। अब वे इस उम्मीद में हैं कि महर्षि कपिल मुनि की तपोभूमि एक बार फिर अपनी पौराणिक आभा में लौट आए।