जैसलमेर हादसे के बाद बीकानेर में दहशत!सड़कों पर दौड़ रही मौत की एसी बसें! कब तक लापरवाह रहेगा प्रशासन और आरटीओ?
दैनिक खबरां,बीकानेर(नारायण उपाध्याय)। जैसलमेर- जोधपुर हाईवे पर मंगलवार को हुई दर्दनाक बस दुर्घटना ने पूरे राजस्थान सहित देश को झकझोर दिया है। चलती एसी स्लीपर बस में आग लगने से 20 लोगों की जलकर मौत ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या अब भी सरकार और प्रशासन जागेगा?
बीकानेर जिले में रोजाना सैकड़ों यात्री दर्जनों एसी बसों में सफर करते हैं। इनमें से कई बसें बिना सुरक्षा मानकों के सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रही हैं। यात्रियों को न तो सही वेंटिलेशन, न सेफ्टी अलार्म, न ही इमरजेंसी एग्जिट की सुविधा मिलती है। कई बसों में पुराने वायरिंग सिस्टम और गैस लीकिंग एसी लगे हैं, जो कभी भी हादसे को जन्म दे सकते हैं।
जैसलमेर हादसे में सामने आया कि बस में आग लगते ही मेंन गेट लॉक हो गया और यात्रियों के पास निकलने का कोई रास्ता नहीं था। एमरजेंसी एग्जिट का इंतजाम ही नहीं था। यह न केवल कंपनी की लापरवाही है बल्कि आरटीओ और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है।
क्या बीकानेर का प्रशासन और आरटीओ अब भी ऑफिस की चारदीवारी में बैठकर कागजों पर सुरक्षा जांच पूरी दिखाएगा या सड़कों पर उतरकर इन बसों की हकीकत देखेगा?nहर रोज हजारों लोग इन “चलती मौत की बसों” में सफर करते हैं। न जाने कब, कहां और किस बस में ऐसा ही हादसा दोहराया जाए,कहना मुश्किल है।
सरकार को अब केवल मुआवजे या बयानबाज़ी से आगे बढ़कर व्यवहारिक कदम उठाने होंगे। बीकानेर आरटीओ को फील्ड पर उतरकर शहर व ग्रामीण मार्गों पर चल रही एसी बसों की सघन चेकिंग करनी होगी। हर बस में फायर सेफ्टी उपकरण, डबल इमरजेंसी एग्जिट, वायरिंग जांच और फिटनेस सर्टिफिकेट की वास्तविक जांच जरूरी है।

