राजस्थान की इस दिन आएगी कांग्रेस की 10 से 12 प्रत्याशियों की पहली लिस्ट, गठबंधन पर फैसला नहीं होने से टिकट अटके
जयपुर। कांग्रेस में गठबंधन पर फैसला नहीं होने से राजस्थान में लोकसभा उम्मीदवारों की घोषणा में देरी हो रही है। अब कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली लिस्ट अगले सप्ताह जारी होने के आसार हैं। शुक्रवार को कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की बैठक में राजस्थान पर चर्चा नहीं हुई। अब 11 मार्च को होने वाली सीईसी की बैठक में करीब 10 से 12 उम्मीदवारों पर फैसला होने की संभावना है।
पहले शुक्रवार को होने वाली सीईसी की बैठक में राजस्थान के लोकसभा प्रत्याशियों पर फैसला होना था, लेकिन गठबंधन वाली सीटों पर फैसला नहीं हो सका। मुकुल वासनिक और अशोक गहलोत सहित आधा दर्जन नेताओं वाली कमेटी ने गठबंधन पर अभी फैसला नहीं किया।
नागौर, बांसवाड़ा, बाड़मेर और चूरू पर फंसा मामला
कांग्रेस में टिकटों में देरी के पीछे गठबंधन वाली सीटों पर मामला अटकने को कारण बताया जा रहा है। बांसवाड़ा, नागौर, बाड़मेर और चूरू सीट को लेकर अभी उम्मीदवार तय करने में गठबंधन और स्थानीय समीकरणों का पेच फंसा हुआ है। हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी से नागौर और बाड़मेर सीट पर गठबंधन की बात चल रही है।
बाड़मेर सीट पर आरएलपी से गठबंधन का कांग्रेस विधायक और वरिष्ठ नेता हरीश चौधरी विरोध कर रहे हैंं। हरीश चौधरी पार्टी की केंद्रीय स्तर पर हुई बैठकों में इसका खुलकर विरोध कर चुके हैं। नागौर सीट पर भी आरएलपी से गठबंधन की बात चल रही है, लेकिन अभी तक फाइनल कुछ भी नहीं हुआ है।
मालवीय के कांग्रेस छोड़ने से समीकरण बदले
बांसवाड़ा सीट पर भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) से गठबंधन की बात चल रही है। कांग्रेस के प्रमुख आदिवासी नेता और पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय पार्टी छोड़कर जा चुके हैं। मालवीय के कांग्रेस छोड़ने से इस सीट के समीकरण बदल गए हैं। मालवीय बीजेपी से उम्मीदवार हैं। कांग्रेस अब बदले हालात में इस सीट पर बीएपी से गठबंधन के प्रयास में है।
चूरू सहित शेखावाटी की दो सीटों पर सीपीएम से गठबंधन की बात चल रही है, लेकिन वह भी अभी फाइनल नहीं हुआ है। चूरू से राहुल कस्वां का बीजेपी से टिकट कटने के बाद समीकरण बदल गए हैं। कांग्रेस राहुल कस्वां को पार्टी में शामिल कर लोकसभा टिकट देने पर विचार कर रही है। लेकिन, कस्वां ने अभी फाइनल फैसला नहीं किया है। ऐसे हालात में चूरू सीट पर टिकट आखिर में घोषित हो सकता है।
कांग्रेस में विधायकों और पूर्व विधायकों को लोकसभा टिकट देने पर विचार किया जा रहा है। स्क्रीनिंग कमेटी ने कई मौजूदा विधायकों के नाम सीईसी को भेजे हैं। झुंझुनूं से बृजेंद्र ओला, कोटा से अशोक चांदना, दौसा से मुरारीलाल मीणा, बाड़मेर से हरीश चौधरी, राजसमंद से सुदर्शन सिंह रावत, अलवर से ललित यादव, बांसवाड़ा से गणेश घोघरा या अर्जुन बामणिया, करौली-धौलपुर से विधायक अनिता जाटव, संजय जाटव को लोकसभा टिकट देने पर विचार किया जा रहा है।
पूर्व मंत्रियों और हारे हुए उम्मीदवारों के भी पैनल में नाम
पूर्व मंत्रियों-सांसद और विधानसभा चुनाव में हारे हुए उम्मीदवारों के नाम भी पैनल में हैं। बीकानेर से पूर्व मंत्री गोविंद राम मेघवाल, झालावाड़-बारां से पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया का नाम पैनल में है। पाली से पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा को मैदान में उतारा जा सकता है। सीएम अशोक गहलोत के बेटे और आरसीए के पूर्व अध्यक्ष वैभव गहलोत को इस बार जोधपुर की जगह जालोर सीट से टिकट देने पर विचार चल रहा है।
चित्तौड़गढ़ सीट पर प्रीति शक्तावत को टिकट संभव
चित्तौड़गढ़ सीट से इस बार वल्लभनगर से पूर्व विधायक प्रीति शक्तावत को टिकट देने की चर्चा है। कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने प्रीति शक्तावत की पैरवी की है। प्रीति के ससुर गुलाब सिंह शक्तावत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। उनका मेवाड़ में अच्छा प्रभाव था। प्रीति के पति गजेंद्र सिंह शक्तावत का पिछली बार विधायक रहते हुए देहांत हो गया था। चित्तौड़गढ़ सीट के सियासी समीकरणों को देखते हुए प्रीति शक्तावत का नाम आगे बढ़ाया गया है।

