देर हो रही है, जल्दी करो..! निकल जाओ इस चक्रव्यूह से बाहर, मिट जाएंगे नकारात्मकता के भाव
संपादकीय कलमगाथा..
दैनिक खबरां(नारायण उपाध्याय)। देर हो रही है, जल्दी करो..! इस भागमभाग भरी जिंदगी की रेस में यह शब्द हर कोई दोहराता है। हम किसके लिए भाग रहें है, क्यों भाग रहें है? कभी एकांत में सोचा आपने, नहीं ना! क्योंकि यह सब सोचने का आपको समय ही नहीं है। आधुनिकता की दौड़ में सोशल मिडिया के जमाने में इंसान इतना व्यस्त हो गया है कि उसको खुद के बारे पता ही नहीं, और ज़ब वह पलट कर देखता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। जवानी की दहलीज पार करके कब उसने बुढ़ापे में कदम रखा यह उसे पता ही नहीं होता है। आज किसी भी घर को देख लो कोई अपनों को कंहा इतना समय दे पता है।
ज़ब से शोशल मिडिया इंसान की जिंदगी में आया तब से परिवारों की दूरियां बढ़ गई और अपने तक सिमट कर रह गई। एक जमाना था, ज़ब संयुक्त परिवार हुआ करता था, एक ही चूल्हे पर खाना पकाया जाता था। घर की महिलाएं एक दूसरे का हाथ बंटाकर घर के सारे काम करती थी,और पूरा परिवार एक ही आंगन में खाना खाते थे। मगर अब शोशल मिडिया ने पुराने रीति रिवाज़ पर मानो ताला सा लगा दिया है। पति पत्नि के रिश्तो में शोशल मिडिया ने इतनी दूरियां बना दी है कि एक ही कमरे में मोबाईल लिए अनजान दुनियां में गुम से रहते है। माना कि शोशल मिडिया आज के जमाने का देवदूत है जिसका आज के युग में बड़ा योगदान है, लेकिन जिस तरह से इंसान के ऊपर हावी होता जा रहा है वो वाकई में बड़ी चिंता का विषय है। आधुनिकता की दौड़ में झूठी शौहरत दिखाने के चक़्कर इतनी व्यवस्ता बढ़ गई है कि ना खाने की फ़िक्र है और ना ही सोने की। सभी की जुबां पर एक ही शब्द है जल्दी करो देर हो रही है। अगर ईमानदारी से एक भी व्यक्ति से उसके दिनभर की दिनचर्या के बारे में पूछा जाए तो कम से कम औसतन 5 से 6 छः घंटे वह सोशल मिडिया पर बिताता होगा। यानि कि दिन के एक तिहाई हिस्से का समय वह सोशल मिडिया पर बिता देता है।
पौराणिक ग्रंथो में लिखा है और ऋषि मुनियों से सुनते आए है कि मानव जीवन बड़ा अनमोल है, करीब चौरासी लाख योनियों के बाद मनुष्य जीवन की प्राप्ति होती होती है। तो, भला कभी अपने परिवार और खुद के लिए समय निकालो और इस भागमभाग भरी जिंदगी के चक्रव्यूह से बाहर निकलो खुद को पहचानो, समाज को पहचानो और अपनों को पहचानो। तोड़ डालो इन सोशल मिडिया की जंजीरो को और समेटों अपनी खुशियों को, जो आपके पास आने को आतुर है। जिस दिन आपने ये खुशियां समेट ली, सच मानो उस दिन से आपके जीवन में से नकारात्मकता के भाव उड़ जाएंगे।

