कलेक्टर साहिबा जी!..दीपावली आई, बीकानेर “चमका” मगर सिर्फ़ रोड़ व डिवाइडर की लाइटों से! सड़के अब भी गड्ढों में रो रही! पढ़े..

Editor बीकानेर बीकानेर जिला प्रशासन

कलेक्टर साहिबा जी!..दीपावली आई, बीकानेर “चमका” मगर सिर्फ़ रोड़ व डिवाइडर की लाइटों से! सड़के अब भी गड्ढों में रो रही!


कलेक्टर साहिबा के वादे की पोल “दीपावली तक चमकेंगी सड़के” निकला सिर्फ़ हेडलाइन का जादू!

दैनिक खबरां,बीकानेर(नारायण उपाध्याय)। जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि का “दीपावली तक बीकानेर की सड़के चमकेंगी” वाला बयान अब शहरभर में मजाक और मीम का विषय बन चुका है। जिला कलेक्टर ने बीते दिनों कलेक्ट्रेक्ट में अधिकारियों की बैठक में बड़े ठाठ से कहा था। “दीपावली तक चमकेगी बीकानेर की सड़के!” कलेक्टर साहिबा के इस आदेश के बाद एक आश जगी थी कि चलो अब कलेक्टर सख्ती के मूड में आ गई है अब तो बीकानेर में गड्ढों में तब्दील सड़कों की दशा सुधरेगी। जो सुधार होना था, वो हुआ ही नहीं। अब कोई कलेक्टर साहिबा को बताए कि दीपावली आ चुकी है, पंच प्रकाश पर्व की शुरुआत हो गई है, पर बीकानेर की सड़के अब भी गड्ढों के अंधकार में डूबी हैं। हाँ, शहर में रोड़, डिवाइडर और गलियों में झिलमिलाती लाइटें जरूर टंगी हैं। शायद प्रशासन को लगा कि अगर सड़क नहीं चमक रही, तो कम से कम लाइटें तो चमका दो।


कलेक्टर का “चमकाओ बीकानेर” मिशन सिर्फ़ बिजली के बल पर!
बीकानेर की सड़कों पर इस वक्त ऐसा दृश्य है मानो सौंदर्यीकरण की परिभाषा बदल गई हो। गड्ढों के बीच लाइटें लहरा रही हैं, टूटी सड़कों के किनारे झालरें झिलमिला रही हैं और अफसरों के मुंह से वही पुराना संवाद। काम जारी है… जनता से सहयोग की अपेक्षा है। जनता पूछ रही है मैडम जी, सड़कें गड्ढों में दबी हैं या आपकी घोषणाओं में?
शहर में कोठारी हॉस्पिटल रोड़, तीर्थ स्तम्भ से भुट्टा का चौराहा, चोखूँटी ओवरब्रिज से हेडपोस्ट ऑफिस रोड़, रानीबाजार, गंगाशहर, पवनपुरी सहित बीकानेर की अनगिनत सड़के अब “एडवेंचर जोन” में तब्दील हो चुका है। लोग बाइक पर नहीं, मानो ऊँट की सवारी कर रहे हों।

लाइटें लगीं, फोटो छपे, बयान आए,पर सड़क वही की वही!
प्रशासन ने शहर में जगह-जगह झालरें लगा दीं, डिवाइडर चमका दिए, लाइटें टांग दीं।  और बस, “मिशन पूरा” घोषित कर दिया! अब अफसर फोटो खिंचवा रहे हैं, जनप्रतिनिधि पोस्ट कर रहे हैं। देखिए, दीपावली पर चमकता बीकानेर! जनता कह रही है “हाँ साहिब, चमक दिखी तो है, बस नीचे नहीं ऊपर!” क्योंकि नीचे तो कीचड़, गड्ढे और टूटी सड़कें हैं,ऊपर बिजली की लटकती झालरें, मानो व्यंग्य कर रही हों। सड़क नहीं चमकी, पर डिवाइडर तो चमक रहा है। शहर में चर्चा है कि कलेक्टर के ऑफिस में अब “सड़क सुधार” नहीं, “सड़क सजावट” की फाइलें मंज़ूर हो रही हैं।
अफसरों का नया फॉर्मूला है। जहां गड्ढा गहरा हो, वहां दो बल्ब और टांग दो… फोटो में सब अच्छा लगेगा। कलेक्टर साहिबा को समझना होगा कि प्रेस नोट और झालरें नहीं, सच्ची कार्रवाई बीकानेर को रोशन करेगी। वरना अगले त्यौहार तक लोग कहेंगे “बीकानेर की सड़के अब भी अंधेरे में हैं, बस फोटो में चमक रही हैं।”