प्रेरक कथा: अगर हम इच्छाओं के पीछे भागते रहेंगे तो कभी भी मन को शांति नहीं मिलेगी

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प्रेरक कथा:अगर हम इच्छाओं के पीछे भागते रहेंगे तो कभी भी मन को शांति नहीं मिलेगी

आज का मीठा मोती
अहंकार के आवेश में आकर जो स्वयं को उच्च समझता है, वो स्वयं का ही आत्मघाती है, स्वयं को ही सर्वोपरि समझना ये बहुत बड़ी भूल है।

सुविचार, @dainikkhabraan। इच्छाओं की वजह से मन अशांत रहता है। हम इच्छाएं पूरी करने के लिए लगातार मेहनत करते हैं, लेकिन सारी इच्छाएं पूरी नहीं हो पाती है, इस कारण मन शांत नहीं हो पाता है। इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार एक धनी सेठ के पास सुख-सुविधा की हर चीज थी, लेकिन उसे शांति नहीं मिल पा रही थी।

एक दिन धनी सेठ एक संत से मिलने पहुंचा। सेठ ने संत के चरणों प्रणाम किया और बहुत सारा धन दान स्वरूप संत के सामने रख दिया। सेठ ने संत से कहा, ‘गुरुदेव मुझे आशीर्वाद दीजिए। कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मुझे शांति मिल जाए और मेरी ओर से ये दान स्वीकार करें।’

संत ने कहा, ‘ये सब यहां से हटा लो, मैं गरीबों से दान नहीं लेता हूं।’ ये सुनकर सेठ को आश्चर्य हुआ।

सेठ ने पूछा, ‘गुरुजी, आप मुझे नहीं जानते हैं, मैं बहुत धनी इंसान हूं, आप मुझे गरीब क्यों बोल रहे हैं?’

संत बोले, ‘अगर तू अमीर है तो मुझसे किस बात का आशीर्वाद लेने आया है?’

सेठ बोला, ‘महाराज आपका आशीर्वाद मिल जाएगा तो मैं इस नगर का सबसे अमीर इंसान बन जाऊंगा। मेरे मन को शांति मिल जाएगी।’

संत ने कहा, ‘भाई जब तुम्हारी इच्छाएं ही अनंत हैं तो शांति कैसे मिलेगी, तुम खुद को भिखारियों से अलग क्यों मानते हो? धन के लोभ में तुम्हें शांति नहीं मिल सकती है। जब तक तुम इच्छाओं का त्याग नहीं करोगे, तब तक मन शांत नहीं हो सकता है। तुम्हारे पास इतना कुछ है, लेकिन तुम अब भी इच्छाओं के पीछे भाग रहे हो तो तुम गरीब ही कहलाओगे।’ सेठ को संत की बातें समझ आ गईं और उसने इच्छाओं के पीछे भागना छोड़ दिया, कुछ ही दिनों में उसके मन में संतुष्टि और फिर शांति आ गई।

अगर हम सुख-शांति चाहते हैं तो हमें भी इच्छा का त्याग करना होगा। लालच से बचना होगा। लालच रहेगा तो हमारा मन शांत नहीं हो सकता। इच्छाओं का त्याग करने के बाद ही मन को शांति मिल सकती है।