बीकानेर। पीबीएम अस्पताल के किसी भी चिकित्सक की सलाह और विश्वास के आधार पर ही मरीज अपने आप को स्वस्थ मानता है, लेकिन सीसीटीवी कैमरे वाले व्यापारी को दिया गया भरोसा उसे ही महंगा पड़ गया। नौबत यहां तक आ गई कि उसे अपने कैमरे उतारने पड़े। अगर पीबीएम अस्पताल प्रशासन नाममात्र का भुगतान भी कर देता तो शायद कैमरे उतारने की नौबत न आती। दानदाता भी कहने पर आगे आ सकते थे।
कोविड की दूसरी लहर में लगाए कैमरे
कोविड की दूसरी लहर में मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण अस्पताल प्रशासन ने एमसीएच विंग को काम में लेना शुरू कर दिया था, लेकिन यहां पर सीनियर चिकित्सकों के नियमित रूप से मरीजों की देखभाल के लिए नहीं आने पर चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गालरिया ने सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए थे, ताकि वे जयपुर बैठे-बैठे यहां की गतिविधियों से परिचित हो सकें। गालरिया उस समय एमसीएच विंग का निरीक्षण करने के लिए बीकानेर आए हुए थे।
27 कैमरे तथा 17 स्पीकर लगाए
एमसीएच विंग की हर गतिविधि को कैद करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने इसमें 27 कैमरे, 17 स्पीकर, एक बड़ी स्क्रीन आदि की व्यवस्था की थी। तत्कालीन अधीक्षक डॉ. परमिन्द्र सिरोही ने निजी फर्क के संचालक को मौखिक आदेश देकर सीसीटीवी कैमरे, स्पीकर आदि की फिटिंग कराई थी। फर्म ने तत्काल मांग के अनुसार कैमरे, स्पीकर आदि लगा दिए थे।
अब दिखाया ठेंगा
गत दिनों फर्म के संचालक ने अस्पताल के वर्तमान संचालक डॉ. पीके सैनी से करीब चार लाख रुपए का भुगतान करने का तकादा किया, तो उन्होंने फर्म के संचालक से कहा कि कैमरे लगाने का कोई लिखित आदेश नहीं है। मौखिक आदेश से भुगतान नहीं किया जा सकता। इस पर फर्म के संचालक ने दो दिन पहले सारे कैमरे, स्पीकर तथा अन्य सामान उतार लिए।
मौखिक आदेश से भुगतान नहीं
किसी के भी मौखिक आदेश से अस्पताल प्रशासन की ओर से किसी तरह का भुगतान नहीं किया जाता। फर्म को कैमरे उतारने को कह दिया है।
– डॉ. पीके सैनी, अधीक्षक पीबीएम अस्पताल
विश्वास महंगा पड़ा
तत्कालीन अधीक्षक डॉ. परमिन्द्र सिरोही ने कैमरे लगाने के लिए मौखिक आदेश दिए थे। इस आधार पर विश्वास करते हुए कैमरे आदि लगा दिए थे। अब भुगतान से मना कर दिया। ऐसे में कैमरे उतारने के अलावा कोई रास्ता नजर नहीं आया।
नंदकिशोर उपाध्याय, संचालक तासी थ्री-60 डिग्री सैक्यूरिटी सोल्यूशन
मौखिक आदेश दिए थे
कोविड के समय सभी व्यवस्थाएं फटाफट करनी थी। इस वजह से कभी लिखित तो कभी मौखिक आदेश दिए जाते थे। कैमरे लगाने के लिए भी संबंधित फर्म को मौखिक आदेश दिए थे। लेकिन उसका भुगतान नहीं हो पाया था।
– डॉ. परमिन्द्र सिरोही, तत्कालीन अधीक्षक पीबीएम अस्पताल
Source: Raj.Patrika

