दस साल पुराने चेक बाउंस प्रकरण में बड़ा फैसला, आरोपी दोषमुक्त

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दस साल पुराने चेक बाउंस प्रकरण में बड़ा फैसला, आरोपी दोषमुक्त


बीकानेर,दैनिक खबरां । करीब एक दशक से न्यायालय में लंबित चल रहे चेक अनादरण प्रकरण में मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया गया। विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एनआई एक्ट प्रकरण) बीकानेर के पीठासीन अधिकारी ललित कुमार, आरजेएस ने साक्ष्यों के विस्तृत विश्लेषण के बाद आरोपी गिरधर गोपाल रील निवासी बान्द्रा बास, गोगागेट को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के आरोप से दोषमुक्त घोषित कर दिया। इस निर्णय से आरोपी को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद राहत मिली है।


अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता जयदीप कुमार शर्मा, शैलेन्द्र खरे एवं मनोज जाजड़ा ने पैरवी की। अधिवक्ता जयदीप कुमार शर्मा ने बताया कि न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद यह निर्णय पारित किया।
मामले के अनुसार परिवादी जयदयाल ने 28 जुलाई 2016 को परिवाद पेश कर आरोप लगाया था कि आरोपी ने दिसंबर 2015 से जनवरी 2016 के बीच निजी आवश्यकता के लिए 4 लाख रुपये उधार लिए थे। राशि की अदायगी के लिए 15 जून 2016 दिनांकित चेक संख्या 434058, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, गोगागेट शाखा का दिया गया, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर “पेमेंट स्टॉप” के कारण अनादरित हो गया।


चेक अनादरण की सूचना मिलने के बाद 2 जुलाई 2016 को विधिक नोटिस प्रेषित किया गया, किंतु भुगतान नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान अभियुक्त ने आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और विवाद के बाद बैंक में भुगतान रुकवाया गया। उसने किसी भी प्रकार की उधारी लेने से इनकार किया।
साक्ष्य और गवाहों के परीक्षण के उपरांत न्यायालय ने माना कि चेक के अनादरण और नोटिस भेजे जाने के तथ्य तो प्रमाणित हुए, लेकिन यह सिद्ध नहीं हो सका कि चेक विधिक देनदारी के भुगतान के लिए जारी किया गया था। धारा 138 के तहत आवश्यक तत्व संदेह से परे सिद्ध नहीं होने पर न्यायालय ने आरोपी को दोषमुक्त घोषित कर दिया तथा पूर्व में प्रस्तुत जमानत मुचलके निरस्त करने के आदेश दिए।