सूरपुरा के भाइयों की अनोखी मिसाल: बहनों के घर 25वां मायरा, बना ‘सिल्वर जुबली मायरा’

बीकानेर विविध समाचार

सूरपुरा के भाइयों की अनोखी मिसाल: बहनों के घर 25वां मायरा, बना ‘सिल्वर जुबली मायरा’

नोखा, दैनिक खबरां। क्षेत्र में पारंपरिक रिश्तों और सामाजिक रिवाजों को निभाने का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। ग्राम सूरपुरा (नोखा) के स्वर्गीय चौधरी गुमानाराम भाम्भू के पुत्र भैराराम, गोपालराम, रामलाल और रामनिवास ने अपनी सात बहनों में सबसे छोटी बहन गीता, पत्नी जगदीश सारण की पुत्री के विवाह उत्सव में ग्राम बेरासर में मायरा रस्म पूरे उत्साह और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न की।
परिवार के इन भाइयों द्वारा अपनी बहनों के घर मायरा देने की परंपरा लंबे समय से निभाई जा रही है। इसी क्रम में यह मायरा उनके परिवार का 25वां मायरा रहा, जिसे विशेष रूप से “सिल्वर जुबली मायरा” के रूप में मनाया गया। समारोह में रिश्तेदारों और ग्रामीणों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मायरा की रस्म निभाई गई।
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में इस तरह 25वां मायरा करने का उदाहरण बहुत कम देखने को मिलता है, इसलिए इसे संभवतः मायरा परंपरा का इकलौता सिल्वर जुबली मायरा माना जा रहा है। इस मायरे की चर्चा इन दिनों सूरपुरा और बेरासर गांव के घर-घर में हो रही है।