राजस्थान: भाभी के प्रेमी का फौजी देवर ने काटा नाक-कान…..

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भाभी के प्रेमी का फौजी देवर ने काटा नाक-कान

भाभी के प्रेमी का फौजी देवर ने काटा नाक-कान:CRPF जवान से बना सब्जी बेचने वाला फिर गैंगस्टर राजू, 1 लाख रुपए का इनाम घोषित

राजस्थान, @dainikkhabraan। भाभी के प्रेमी का नाक-कान काटकर क्राइम की दुनिया में कदम रखने वाला कुख्यात गैंगस्टर राजू फौजी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। फौजी ने 8 महीने पहले भीलवाड़ा में दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। पुलिस उसे तबसे ढूंढ रही है लेकिन वो पुलिस के गिरफ्त से बाहर है। डेढ़ महीने पहले भी रायला के पास गैंगस्टर राजू फौजी की सूचना पर पीछा किया था। हालांकि इसमें कोई दूसरा बदमाश था लेकिन इस हादसे में भी एक पुलिस जवान की मौत हो गई।

नक्सली खतरों के चलते वो छुट्टियां लेकर गांव आ गया और फिर कभी CRPF कैंप नहीं गया।
नक्सली खतरों के चलते वो छुट्टियां लेकर गांव आ गया और फिर कभी CRPF कैंप नहीं गया।

पुलिस ने गैंगस्टर को पकड़ने के लिए भी 1 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा है लेकिन पुलिस का यहां भी मुखबिर तंत्र फेल हो गया। पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद अपने साथियों को साफ कह दिया था कि या तो मरेंगे या फिर मारेंगे। इधर, राजू फौजी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया।नक्सली खतरों के चलते वो छुट्टियां लेकर गांव आ गया और फिर कभी CRPF कैंप नहीं गया।

राजस्थान-एमपी में खड़ा किया अफीम तस्करी का बड़ा नेटवर्क

सीआरपीएफ का जवान जो बाद में सब्जी का ठेला चलाने लगा और बाद में गैंग का सरगना बना। कुछ ही समय में राजस्थान और एमपी में स्मैक के साथ अफीम तस्करी का बड़ा नेटवर्क तैयार किया बाड़मेर, जोधपुर, जालौर, नागौर, जैसलमेर और बीकानेर जिलों में दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज है। इसके लॉरेंस विश्नोई के साथ-साथ हरियाणा की भी कई बदमाश गैंग से संपर्क सामने आये हैं। हालांकि पुलिस टीम आरोपी के पीछे लगी है। लेकिन अधिकारियों का ये भी दावा है कि आरोपी का पकड़ में न आने का एक कारण उस पर रखा इनाम भी हो सकता है। प्रदेश में तस्करी का सबसे बड़ा संगठित गिरोह चलाने वाले बदमाश राजू फौजी महज एक लाख रुपये का पुलिस इनाम है। इसके चलते इसकी मुखबिरी भी कमजोर है। पुलिस का बड़ा चैलेंज ये भी है कि आरोपी अपने पास मोबाइल भी नहीं रखता है। अकेला रहता है।

राजू फौजी ने भाई के ससुराल वालों का अपहरण और पिटाई जैसी वारदातों को भी अंजाम दिया।
राजू फौजी ने भाई के ससुराल वालों का अपहरण और पिटाई जैसी वारदातों को भी अंजाम दिया।

खतरों की वजह से छोड़ी नौकरी और लगाया सब्जी का ठेला

राजू विश्नोई उर्फ राजू फौजी जोधपुर से सटे बाड़मेर जिले के डोली गांव का है। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपनी मजबूत कद-काठी की बदौलत राजू CRPF (सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स) में भर्ती हो गया। यहां उसकी पोस्टिंग नक्सल प्रभावित एरिया में हो गई। उन दिनों में राजू फौजी के साथ रहे लोग बताते है कि उसे ये नौकरी पसंद नहीं थी और नक्सली खतरों के चलते वो छुट्टियां लेकर गांव आ गया और CRPF कैंप नहीं गया। थोड़े दिन तो वो गांव में ही रहा लेकिन बाद में बेरोजगारी दूर करने के लिए जोधपुर चला आया और यहां भगत की कोठी एरिया में सब्जी का ठेला लगा लिया। लेकिन CRPF में की गई नौकरी के चलते राजू को तब तक फौजी सरनेम मिल गया था।राजू फौजी ने भाई के ससुराल वालों का अपहरण और पिटाई जैसी वारदातों को भी अंजाम दिया।

खरताराम के सुसाइड के बाद बना तस्करी गैंग का सुप्रीमो
खरताराम के सुसाइड के बाद बना तस्करी गैंग का सुप्रीमो

भाभी के प्रेमी का नाक-कान काटकर आया सुर्खियों में

पुलिस रिकॉर्ड से मिली जानकारी के अनुसार साल 2012 में फौजी की भाभी एक ट्रक ड्राइवर के साथ भाग गई थी। इससे वो नाराज था। उसने गुस्से में आकर बिलाड़ा में भावी फाटक पर जाकर दिनदहाड़े भाभी के प्रेमी की जमकर पिटाई कर दी और उसके नाक-कान काट दिए। इससे इलाके में राजू फौजी की दहशत शुरू हो गई। हांलाकि इससे पहले भी उस पर छोटी-मोटी मारपीट के मामले दर्ज थे। इस कांड के बाद राजू फौजी ने भाई के ससुराल पक्ष के लोगों का अपहरण और उनकी संगीन पिटाई जैसी वारदातों को भी अंजाम दिया।

आतंक इतना की टोल नाके के कर्मचारी देखकर भाग जाते थे

राजू फौजी ने 19 मई 2018 को बाड़मेर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में तकरीबन 35 बदमाशों के साथ हथियारों के दम पर डोली टोल नाके को लूटा था। इस दौरान वहां खौफ का ये आलम था कि टोल नाके के कर्मचारी इससे देखकर पैदल ही भाग जाते थे। धीरे-धीरे उसकी दहशत ऐसी फैली की उसने बाड़मेर इलाके में कई व्यापारियों और कंपनियों को डरा-धमकाकर वसूली शुरू कर दी। इसी दौरान उसका सम्पर्क कुख्यात तस्कर खरताराम से हो गया और वो खरताराम की गैंग से तस्करी की दुनिया में भी आ गया।खरताराम के सुसाइड के बाद बना तस्करी गैंग का सुप्रीमो

हथियार के दम पर कई बार पुलिस नाकबंदी को तोड़ा​​​​​​

तकरीबन 3 साल पहले पाली के भीमाणा गांव की पहाड़ियों में पुलिस कार्रवाई के दौरान खरताराम चारों तरफ से घिर गया था। उसके और पुलिस के बीच जमकर मुठभेड़ भी हुई। पुलिस ने घेराबंदी की और बचने का कोई रास्ता नहीं मिला तो खरताराम ने खुद को गोली मार ली। खरताराम की मौत के बाद राजू फौजी ने उसकी तस्कर गैंग का टेक ओवर कर लिया। धीरे-धीरे उसने गैंग का विस्तार बाड़मेर से बाहर जोधपुर, नागौर बीकानेर, पाली, जैसलमेर, चित्तौड़, भीलवाड़ा, जालोर और सिरोही तक कर लिया। स्मैक और अफीम की तस्करी के दौरान फौजी ने सैकड़ों बार हथियारों के दम पर पुलिस नाकाबंदी तोड़ी। हाल ऐसे रहे कि ज्यादातर तो बदनामी के डर से मामले ही दर्ज नहीं हुए।फौजी गैंग के तकरीबन 12 कुख्यात बदमाश पुलिस की पकड़ में आ चुके हैं।

फौजी गैंग के तकरीबन 12 कुख्यात बदमाश पुलिस की पकड़ में आ चुके हैं।
फौजी गैंग के तकरीबन 12 कुख्यात बदमाश पुलिस की पकड़ में आ चुके हैं।

दो कॉन्स्टेबल की हत्या के बाद साथियों से बोला- मरेंगे या मारेंगे

​​​​​​​अब तक पकडे गए फौजी के साथियों से हुई पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि भीलवाड़ा में दो पुलिसकर्मियों के हत्या के बाद उसे जरा भी अफ़सोस नहीं था। उसने तो बाकायदा सभी साथियों से कहा था कि अब मरेंगे या मारेंगे। उसका ये एटीट्यूड देखकर गैंग के कई साथी डर भी गए और चुपके से उसे छोड़कर सरेंडर के रास्ते देखने लग गए। अब तक उसकी गैंग के तकरीबन 12 कुख्यात बदमाश पुलिस की पकड़ में आ चुके हैं।