नोहर न्यायिक मजिस्ट्रेट पर दबाव बनाने के लिए की जा रही कार्यवाही आपत्तिजनक
नोहर अभिभाषक संघ की बैठक में पारित हुआ प्रस्ताव- न्यायिक मजिस्ट्रेट का आचरण विधिसंगत, अभियोजन अधिकारियों के खिलाफ निदेशक को भेजी जाएगी प्रस्ताव की प्रति
नोहर/हनुमानगढ़, @दैनिक खबरां। नोहर न्यायिक मजिस्ट्रेट पर दबाव बनाने के लिए स्थानीय अभियोजन अधिकारियों के निर्देशन पर विभिन्न संगठनों की ओर से चलाई जा रही आपत्तिजनक कार्यवाही के खिलाफ अभिभाषक संघ नोहर द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया है।
जिसकी प्रति राजस्थान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार, बार कौंसिल ऑफ राजस्थान तथा निदेशक, अभियोजन को भेजी जाएगी। मंगलवार को पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि अभियोजन अधिकारी कृष्णा स्वामी द्वारा न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आपत्तिजनक आचरण पर न्यायिक मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर पारीक द्वारा अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई।
जिस पर अभिभाषक संघ अध्यक्ष मुरारी लाल चौमवाल सहित वहां मौजूद अभिभाषकों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट से यह कार्यवाही ड्रॉप करने का अनुरोध किया।
स्वयं अभियोजन अधिकारी कृष्णा स्वामी ने भी अपनी गलती महसूस की, जिसके चलते अवमानना की कार्यवाही नहीं की गई।
इसके बाद अभियोजन अधिकारी कृष्णा स्वामी द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारी लखवीर सिंह राठौड़ के सहयोग व निर्देशन में लगातार विभिन्न अभिभाषक संघों एवं अभियोजन अधिकारियों के संगठन से संपर्क कर नोहर न्यायिक मजिस्ट्रेट पर दबाव बनाने के लिए अनेक निंदा प्रस्ताव पारित करवाए गए हैं, जो आपत्तिजनक एवं असत्य हैं।
अभिभाषक संघ की ओर से सर्वसम्मति से यह भी प्रस्ताव लिया गया है कि वर्तमान अभियोजन अधिकारियों के यहां रहने से न्यायिक कार्यवाही सुचाारू रूप से नहीं चल पाएगी, इसलिए इस संबंध में निदेशक, अभियोजन को अवगत करवाया जाएगा। प्रस्ताव की प्रतिलिपि रजिस्ट्रार, हाईकोर्ट, राजस्थान तथा बार कौंसिल ऑफ राजस्थान को भेजी जाएगी। अभिभाषक संघ, नोहर के अध्यक्ष मुरारी लाल चौमवाल ने बताया कि राज्य के विभिन्न अभिभाषक संघों द्वारा अभिभाषक संघ, नोहर से जानकारी लिए बिना ही न्यायिक मजिस्ट्रेट, नोहर के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किए गए हैं, इसलिए उन सभी अभिभाषक संघों को सही जानकारी एवं यह प्रस्ताव भेजकर अनुरोध किया जाएगा कि वे अपने निंदा प्रस्ताव पर पुनर्विचार करें।
उन्होंने बताया कि यदि न्यायिक मजिस्ट्रेट का आचरण अनुचित होता तो सबसे पहले अभिभाषक संघ, नोहर द्वारा ही आपित्त दर्ज करवाई जाती लेकिन न्यायिक मजिस्ट्रेट चंद्रशेखर पारीक का आचरण विधिसंगत है तथा किसी भी प्रकार से निंदा के योग्य नहीं है।

