आजाद भारत में ये कैसा समानता का अधिकार ? सत्ता और अपराध के कटघरे के बीच बेरोजगार युवाओं के साथ सौतेला व्यवहार!

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आजाद भारत में ये कैसा समानता का अधिकार ? सत्ता और अपराध के कटघरे के बीच बेरोजगार युवाओं के साथ सौतेला व्यवहार!

पत्रकार नारायण उपाध्याय की कलम से..
दैनिक खबरा । देश के संविधान ने नेताओं को बड़ी राहत दे रखी है जंहा उन पर दर्ज मुकदमे और जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने की आजादी दी है। सरकार ने 2013 में जनप्रतिनिधि एक्ट में संशोधन कर ऐसा प्रविधान कर दिया था कि दोषी करार व्यक्ति वोट तो नहीं डाल सकता लेकिन चुनाव जरूर लड़ सकता है। मौजूदा समय में दो वर्ष से कम के कारावास की सजा वालों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाती है। तो वंही इसके उलट अगर कोई बेरोजगार सरकारी नौकरी की चाह रख रहा है और किसी कारणवश उसके उपर मुकदमा दर्ज हो गया तो उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ता है। देश में समानता का अधिकार सबको मिलना चाहिए।

यह देश का दुर्भाग्य है कि आपराधिक मामलों में आरोपी नेताओं को राजगद्दी का अधिकार दिया जा रहा तो दूसरी तरफ शिक्षित युवा जो अपनी योग्यता और मेहनत के दम पर कई सीढ़िया चढ़ कर देश के लिए कुछ करना चाहता है, उसके लिए सीमाएं बाँधी जा रही है। इस तरह के दो तरफा नियम लगाना क्या न्याय संगत है ? क्या हम उस आजाद भारत में रह रहे है जंहा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, शहीद भगतसिंह और बाबा साहेब जैसी महान विभूतियाँ ने देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना बहुत बड़ा योगदान दिया था। देश में शुरू से ही सत्ता और अपराध का चोली दामन का साथ रहा है। 

देश के चुनावों और उससे संबंधित आंकड़े इकट्ठा करने वाली एडीआर की हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है, उसमें सासंदों और पार्टीवार नेताओं के क्रिमिनल रिकॉर्ड का ब्योरा जारी किया गया है। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सभा और लोकसभा के सासंदों की संख्या को पूरा मिला कर देखें तो, तकरीबन 30 फीसदी सांसद दागी हैं, इनमें से 17 फीसदी सासंदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं|  लोकसभा में 542 सासंदों में से 179 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो कुल संख्या का 33 फीसदी है। वहीं, 114 के खिलाफ तो संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। ठीक उसी तरह राज्यसभा के 228 सासंदों में से 51 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं, 20 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस तरह से दोनों सदन के सासंदों को मिला कर देखें तो 770 सासंदों में से 230 दागी हैं, जो पूरी संख्या का 30 फीसदी है।

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, एआईएडीएमके के 50 सांसदों में से 10 के खिलाफ आपराधिक मामले तो वहीं 3 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।राजद के 9 सांसदों में से 7 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इतना ही नहीं, 6 के खिलाफ तो संगीन आपराधिक मामले भी दर्ज हैं. टीडीपी के 22 सासंदों में से 7 के खिलाफ आपराधिक और 1 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। एनसीपी के 11 सांसदों में से 6 दागी हैं। हालांकि, 5 के खिलाफ तो संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। इतनी बड़ी फेहरिस्त को देखकर देश का शिक्षित युवा बेरोजगार अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है। देश के कानून निर्माताओं को इस और ध्यान देना चाहिए ताकि आजाद भारत में सबको समानता का आधिकार मिले।

नोट : हम किसी भी आपराधिक मामलों सें जुड़े व्यक्ति या पार्टी के पक्ष में नहीं है और ना ही इनका समर्थन करते है।