नए पश्चिमी विक्षोभ से बारिश का दौर शुरू, 12 जिलों में बारिश की संभावना..

बीकानेर

नए पश्चिमी विक्षोभ से बारिश का दौर शुरू, 12 जिलों में बारिश की संभावना..

बीकानेर@दैनिक खबरां। पश्चिमी विक्षोभ के असर से दिनभर आसमान में घने बादल छाये रहे। दोपहर बाद क्षेत्र में तेज हवाओं के साथ सीकर, नागौर, जयपुर जिले के जोबनेर, रेनवाल, कालवाड क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया, जो देर शाम तक चलता रहा। राजस्थान के खेतों में जौ, गेहूं, चने की कटाई कर रहे किसानों के चेहरों पर मौसम को लेकर चिंता सताने लगी है। नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण मार्च में बेमौसम बारिश का दौर शुरू हो गया है।

12 जिलों में बारिश की संभावना…


मौसम विभाग ने 13 जिलों अलवर, टोंक, झुंझुनू, चूरू, बीकानेर,सीकर, नागौर, अजमेर, भीलवाड़ा, जयपुर, दौसा, उदयपुर और पाली जिलों और आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं पर मेघगर्जन, आकाशीय बिजली के साथ बूंदाबांदी और हल्की बारिश की संभावना जताई है। झुंझुनू, सीकर, जयपुर (उत्तर) जिलों और आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं ओलावृष्टि की भी प्रबल संभावना है।

30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी हवा…

जयपुर मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि प्रदेश में नए पश्चिमी विक्षोभ का अगले एक सप्ताह तक असर रहेगा, जिससे बीकानेर संभाग के अलावा जोधपुर और जयपुर संभाग में आगामी दिनों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। जयपुर जिले में सर्वाधिक बारिश जोबनेर में 22 एमएम दर्ज की गई है। वहीं, अधिकतम तापमान में 3.6 डिग्री की गिरावट देखी गई है।

अगले एक सप्ताह प्रदेश में होगी बारिश…


मौसम विभाग के मुताबिक, एक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राज्य के ऊपर एक प्रेरित परिसंचरण तंत्र बन चुका है। हवाओं के साथ अरब सागर के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी से भी नमी की सप्लाई हो रही है। राज्य में आगामी एक सप्ताह के दौरान मेघगर्जन के साथ कुछ भागों में हल्की से मध्यम बारिश, अचानक तेज हवाएं (30-40 Kmph) और कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने की प्रबल सम्भावना है।

विशेष कृषि मौसम सलाह…


पककर तैयार सरसों, चना, जीरा और अन्य रबी फसलों की कटाई कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर स्टोरेज करें।
कृषि उपज मंडियों में खुले में रखे हुए अनाज और जिंसों को सुरक्षित स्थान पर स्टोर करें, ताकि उन्हें भीगने से बचाया जा सके।
रबी की फसलों में सिंचाई और किसी भी प्रकार का रासायनिक छिड़काव बारिश की गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए ही करें।