जब हम अपनों के बीच मना रहे थे दीपावली की खुशियां, तो वंही ये सेवादार अपनों से दूर ट्रोमा में कर रहे थे मरहम पट्टी..
बीकानेर@दैनिक ख़बरां। जब पूरा शहर अपने-अपने परिवार के साथ दीपावली का त्यौहार सेलिब्रेट कर रहा था, तो वंही दूसरी और बीकानेर की एक ऐसी संस्था निस्वार्थ भाव से पीबीएम के ट्रोमा में मुस्तैदी से डटी हुई थी। जंहा आतिशबाजी से झुलसे व हादसों में घायल होकर आने वाले मरीजों की सार संभाल की जा रही थी। हम बात कर रहे है असहाय सेवा संस्थान की, जिनके सेवादार हर वर्ष की भांति इस बार भी दीपावली का त्यौहार अपनों के बीच मनाने की बजाय आतिशबाजी से घायल होकर ट्रोमा पहुंचने वाले मरीजों की सार संभाल व मरहम पट्टी करने में जुटे हुए थे।
असहाय सेवा संस्थान के राजकुमार खड़गावत ने बताया दीपावली से तीन दिन पहले ही उनकी टीम ने ट्रोमा में मोर्चा संभाल लिया था। जंहा दीपावली की रात को एक अलग से काउंटर लगाकर आतिशबाजी से झुलसे हुए मरीजों की मरहम पट्टी की गई। खड़गावत के अनुसार आधी रात तक सैकड़ों की तादाद में आतिशबाजी से झुलसे लोग ट्रोमा में पहुंचते रहे जिनमे बच्चो से लेकर बड़े तक शामिल थे। जंहा घायलों की ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ के साथ मिलकर इलाज में मदद की गई। खड़गावत के साथ उनकी टीम में ताहीर हुसैन, अब्दुल सत्तार, रमजान मो.जुनैद , कैलाश गहलोत आदि पूरी रात मुस्तैदी के साथ डटे रहे।
गौरतलब है, असहाय सेवा संस्थान के सेवादार किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के लिए तैयार रहते है । चाहे वो कोई असहाय या लावारिस किसी भी स्थिति में हो या फिर किसी भी प्रकार की बीमारी से पीड़ित हो, मरीज का पता चलते ही संस्थान के सेवादार उसे अस्पताल में भर्ती करवाकर इलाज में मदद करते है, यही नही जब तक वो ठीक नही हो जाता तब तक उसकी सेवा चाकरी भी करते है। साथ ही लावारिस लाशों का धर्म के हिसाब से अंतिम संस्कार करवाने में मदद करते है।



