डीओआईटी में डिजिटल किट खरीद घोटाला उजागर, हाईकोर्ट ने एसीबी और अधिकारियों से मांगा जवाब
जयपुर। डीओआईटी (सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग) में हुए घोटालों की परतें अब खुलने लगी हैं। डिजिटल पेमेंट किट खरीद घोटाले को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही डीओआईटी के अधीन आने वाली कंपनी राजकॉम्प इंफो सर्विसेज लिमिटेड तथा 5 संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए की गई।
कैसे हुआ घोटाला
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी और डॉ. टी.एन. शर्मा ने बताया कि राजस्थान में ई-मित्र संचालकों को डिजिटल पेमेंट किट बांटने के नाम पर भारी अनियमितताएं की गईं।
👉सितंबर 2017 में 19 करोड़ का टेंडर जारी किया गया जिसे बाद में 33 करोड़ कर दिया गया।
👉टेंडर के तहत 8592 डिजिटल किट खरीदी जानी थी, जिनमें टैबलेट, पीओएस मशीन और फिंगरप्रिंट स्कैनर शामिल थे।
👉मार्च 2019 तक केवल 4964 किट ही सक्रिय हो पाई थीं, जिनमें भी एक भी मासिक ट्रांजेक्शन नहीं हो रहा था।
इसके बावजूद सभी किट का भुगतान कर दिया गया और सब्सक्रिप्शन व रख-रखाव के नाम पर करीब 8 करोड़ रुपये अतिरिक्त फर्म को दे दिए गए। सीएजी ने भी इस पर आपत्तियां दर्ज कीं, लेकिन विभाग ने उन्हें दरकिनार कर दिया।
हाईकोर्ट की सख्ती
मामले की सुनवाई जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ में हुई। खंडपीठ ने आश्चर्य जताया कि 2020 में दाखिल जनहित याचिका पर अब तक एसीबी ने कोई जवाब क्यों नहीं दिया। कोर्ट ने एसीबी को 15 दिनों में जवाब पेश करने का अंतिम अवसर दिया और स्पष्ट किया कि जवाब नहीं आने पर संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।उच्च न्यायालय ने राजकॉम्प इंफो सर्विसेज लिमिटेड के साथ-साथ अधिकारी हंसराज यादव, सीताराम स्वरूप, रणवीर सिंह, नीलेश शर्मा और कौशल सुरेश गुप्ता को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही सप्लाई करने वाली फर्म सीआरआईएलपीएल को भी नोटिस भेजा गया है।

