सर्दी बचाने का जुगाड़ बना मौत : रात में कमरे में जलाई थी सिकड़ी, खिड़की-दरवाजे बंद होने से दम घुटने से बेटे की मौत, मां का इलाज जारी

पाली पुलिस कार्रवाई राजस्थान राज्य

सर्दी बचाने का जुगाड़ बना मौत : रात में कमरे में जलाई थी सिकड़ी, खिड़की-दरवाजे बंद होने से दम घुटने से बेटे की मौत, मां का इलाज जारी

पाली, @दैनिक खबरां। पाली जिले के खिंवाड़ा थाना क्षेत्र के जोजावर गांव में शुक्रवार शाम को तेज सर्दी से बचने के लिए वन संरक्षक सीमा ने अपने कमरे में सिगड़ी जलाई ओर दोनों बच्चों के साथ सो गई। खिड़की-दरवाजे बंद होने से धुएं से 14 साल के मासूम की दम घुटने से मौत हो गई तथा वन संरक्षक भी गंभीर घायल हो गई। जिसे प्राथमिक उपचार के बाद पाली के बांगड़ हॉस्पिटल के ट्रोमा वार्ड में भर्ती किया। जहां उसका इलाज चल रहा हैं।

जानकारी के अनुसार सीमा पुत्र भैरूनाथ जोजावर वन चौकी में वन संरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उनके पति की मौत हो चुकी हैं। शुक्रवार शाम को तेज सर्दी को देखते हुए उसने कोयले से सिकड़ी जलाई ओर कमरे में रख कर दोनों बेटों के साथ कमरे में सो गई। कमरे के खिड़की-दरवाजे बंद थे। रात में सिकड़ी बुझी तो उसका धुंआ कमरे में फैल गया। जिससे सीमा व 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले 15 वर्षीय बेटे अजयनाथ की तबीयत बिगड़ गई। जिन्हें उपचार के लिए जोजावर हॉस्पिटल लाया गया। जहां अजयनाथ को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। गंभीर घायल सीमा को पाली रेफर किया। जहां उसका बांगड़ हॉस्पिटल में उपचार जारी हैं।

8 बजे तक भी नहीं उठी तो पड़ोसी ने देखा तो कमरे में धुंआ ही धुंआ था
वन संरक्षक सीमा के कमरे के निकट ही वनसंरक्षक इन्द्रा का कमरा हैं। शनिवार सुबह 8 बजे तक भी सीमा नहीं उठी तो इन्द्रा उसे उठाने उसके कमरे की तरफ गई। धुंआ ही धुंआ देख उसने तुरंत कमरे का दरवाजा खोला। तो सीमा व उसका बड़ा बेटा अजयनाथ बेहोशी की हालत में मिली। जिन्हें तुरंत जोजावर हॉस्पिटल ले गई। जहां डॉक्टर ने जांच के बाद 15 साल के अजयनाथ को मृत घोषित कर दिया।

इसलिस बच गया छोटा बेटा
सहायक वनपाल तुलसीराम मीणा ने बटा किया सीमा का छोटा बेटा इस हादसे में बच गया। उससे पूछा तो उसने बताया कि सर्दी के कारण उसने रजाई ओढ़ रखी थी। जिससे धुंआ उसकी बॉडी में नहीं गया। संभवत इसी कारण वह बच गया।

कॉर्बन मोनो ऑक्साइड गैस बनी मासूम की मौत का कारण
बांगड़ हॉस्पिटल के डॉ एचएम चौधरी ने बताया कि सर्दी दूर भगाने को लोग अक्सर हीटर, ब्लोअर के अलावा अंगीठी (सिगड़ी) का इस्तेमाल करते हैं। शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में अंगीठी का इस्तेमाल ज्यादा होता हैं। अंगीठी में कच्चे कोयले या लकड़ी का इस्तेमाल होता है। इससे कॉर्बन मोनो ऑक्साइड गैस निकलती है। यह गैस कमरे में ऑक्सीजन को रिप्लेस कर दी है। ऑक्सीजन की कमी से व्यक्ति बेहोशी की स्थिति में चला जाता है। इससे दम घुटने की आशंका प्रबल हो जाती है। कमरे के खिड़की, दरवाजे बंद रहने से अक्सर यह मौत का कारण बन जाती हैं।