ओबीसी आयोग की जनसुनवाई में उठा मूल ओबीसी आरक्षण का मुद्दा, समाज प्रतिनिधियों ने सौंपा 11 सूत्रीय ज्ञापन

बीकानेर राजनीति राजस्थान

ओबीसी आयोग की जनसुनवाई में उठा मूल ओबीसी आरक्षण का मुद्दा, समाज प्रतिनिधियों ने सौंपा 11 सूत्रीय ज्ञापन

दैनिक खबरां,बीकानेर। राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष मदनलाल भाटी ने गुरुवार को जिला परिषद सभागार में जनसुनवाई कर ओबीसी आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर समाजजन की राय आमंत्रित की। इस दौरान विभिन्न संस्थाओं और समाज प्रतिनिधियों ने आयोग के समक्ष ज्ञापन प्रस्तुत कर ओबीसी आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई।

जनसुनवाई में भारतीय प्रजापति हीरोज़ ऑर्गेनाइजेशन के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट अशोक प्रजापत, श्री कुम्हार महासभा के अध्यक्ष त्रिलोकचंद गेधर, बीपीएचओ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष किशन संवाल, भाजपा जिला उपाध्यक्ष सोहनलाल प्रजापत, कुम्हार महासभा महामंत्री जेठाराम जालप, नवल प्रजापत एवं गणेश भूटिया सहित अन्य समाजजन मौजूद रहे।

प्रतिनिधियों ने 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए कहा कि बड़े वर्गों के राजनीतिक दबाव के कारण मूल ओबीसी समुदाय अपने वास्तविक अधिकारों से वंचित हो रहा है। समाजजन ने आयोग अध्यक्ष से अपेक्षा जताई कि वे निष्पक्ष निर्णय लेकर वंचित तबकों को उनका उचित अधिकार दिलाने की पहल करेंगे।

11 सूत्रीय मांगें इस प्रकार—

1. केंद्र की तर्ज पर राजस्थान में ओबीसी आरक्षण 21% से बढ़ाकर 27% किया जाए।
(प्रतिनिधियों ने कहा कि ईडब्ल्यूएस लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की 50% सीमा अप्रासंगिक हो गई है।)


2. क्रीमी लेयर को पूर्णतः समाप्त किया जाए अथवा आर्थिक सीमा बढ़ाई जाए।


3. स्थानीय निकाय एवं पंचायत राज चुनाव में ओबीसी को एससी–एसटी की तरह आबादी के अनुपात में आरक्षण दिया जाए।


4. ओबीसी का वर्गीकरण तीन श्रेणियों—
A. कृषक/पशुपालक,
B. कामगार/शिल्पकार,
C. घुमंतू प्रवृत्ति—में कर लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुँचाया जाए।


5. ओबीसी समुदाय को नौकरी में एससी–एसटी की तरह प्रमोशन आरक्षण दिया जाए।


6. संसद व विधानसभा चुनावों में भी ओबीसी को आरक्षण प्रदान किया जाए।


7. माटीकला, केश कला सहित कामगार जातियों से जुड़े बोर्डों को पूर्ण संवैधानिक दर्जा एवं पृथक मंत्रालय बनाया जाए।


8. RAS/IAS व अन्य क्लास–I सेवाओं के इंटरव्यू पैनल में ओबीसी प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया जाए।


9. कामगार जातियों के विकास हेतु प्रत्येक शहर में अलग बाजार, कच्चे माल की उपलब्धता व दीर्घकालीन व्यवस्था की जाए।


10. कुम्हार समाज के लोगों के लिए प्रत्येक गांव–शहर में मिट्टी हेतु सरकारी भूमि का आवंटन किया जाए।