जेल में विचाराधीन कैदी ने तौलिए से लगाया फंदा, पॉक्सो केस में 3 मार्च को भेजा था कारागृह; भाई बोला- सुसाइड नहीं, मर्डर है
बालोतरा (बाड़मेर)। बालोतरा जिले के उप कारागृह की बैरक में शुक्रवार देर रात पॉक्सो केस में विचाराधीन कैदी ने तौलिए से फंदा लगाकर सुसाइ़ड कर लिया। घटना की जानकारी शनिवार सुबह मिली तो बालोतरा एसडीएम राजेश कुमार, न्यायिक मजिस्ट्रेट गजेंद्र कुमार समेत मौके पर पहुंचे। कोर्ट ने बाड़मेर निवासी चेनाराम प्रजापत (23) पुत्र जेठाराम प्रजापत को 3 मार्च को जेल भेजा था। इसके बाद चेनाराम ने देर रात सुसाइड कर लिया।
बाथरूम के गेट से लगाया फंदा
जेल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक- चेनाराम ने देर रात 3 से 4 बजे के बीच बैरक के बाहर बाथरूम के गेट पर तौलिए से फंदा लगाकर सुसाइ़ड किया। कुछ ही देर के बाद बैरक का एक और कैदी बाथरूम गया तो उसे गेट पर शव लटका मिला।
कैदी ने तुरंत सुरक्षा गार्ड को आवाज लगाई। सुरक्षा गार्ड ने जेलर को घटना की सूचना दी। इसके बाद जेल प्रशासन की ओर से बालोतरा एसडीएम राजेश कुमार को जानकारी दी। बालोतरा एसडीएम सुबह करीब 8 बजे बालोतरा उप कारागृह पहुंचे।
एसडीएम के पहुंचने के बाद जेलर ने मृतक के परिजनों को सूचना दी। सुबह 11 बजे मृतक चेनाराम के परिजन बालोतरा पहुंच गए।
महिला बैरक में बंद था चेनाराम
जानकारी के मुताबिक चेनाराम उप कारागृह के महिला बैरक मे बंद था। उप कारागृह के पुरुष बैरक में कैदियों की संख्या ज्यादा होने से चेनाराम को महिला बैरक में रखा गया था। महिला बैरक में चेनाराम के अलावा 8 अन्य कैदी भी बंद थे। चेनाराम अविवाहित और 12वीं कक्षा तक पढ़ा था। वह मजदूरी करता था। पिता की कुछ साल पहले मौत हो चुकी है और चेनाराम समेत 3 भाई हैं। बाकी दो मजदूरी करते हैं।
भाई बोला- सुसाइड नहीं मर्डर है
चेनाराम का भाई भंवराराम प्रजापत सुसाइड की सूचना पर उप कारागृह पहुंचा। उसने कहा- चार-पांच दिन पहले ही पुलिस चेनाराम को पकड़कर ले गई थी। शुक्रवार सुबह ही मैंने चेनाराम से जेल में मुलाकात की थी। उसने बताया था कि कोई तकलीफ नहीं है। आज सुबह ही पुलिस वालों ने सूचना दी कि कि आपके भाई ने जेल की बैरक में सुसाइड कर लिया है। जो स्थिति है उसे देखकर लगता नहीं कि चेनाराम ने सुसाइड किया है, उसे मारा गया है।
चेनाराम के परिजन और कुछ ग्रामीण बालोतरा राजकीय नाहटा अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर धरने पर बैठ गए। उनकी मांग है कि उचित मुआवजा दिया जाए। परिवार के एक सदस्य सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। परिजनों को कहना है कि मांगें पूरी नहीं हुई तो शव नहीं उठाएंगे।

