बीकानेर। लालगढ़ ओवरब्रिज ओवरब्रिज की राह में रोड़ा बनी प्रापर्टी के एवज में यूआईटी ने आरएसआरडीसी को अच्छी खासी चपत लगाई है। यूआईटी भूमि अवाप्ति अधिनियम 2013 के तहत इस भूखंड की कीमत 16 लाख रुपए आंकी थी। अब यूआईटी ने प्रापर्टी मालिक को जमीन के बदले जमीन दे दी। अब यूआईटी अपनी जमीन की कीमत एक करोड़ 16 लाख रुपए आरएसआरडीसी से राशि की डिमांड की है।
दरअसल पूर्व सीएम वसुंधराजे के कार्यकाल में लालगढ़ ओवरब्रिज मंजूर हुआ था। रेलवे के साथ मिलकर आरएसआरडीसी को ये काम कराने का जिम्मा सौंपा गया। करीब 30 करोड़ रुपए का भुगतान हो हो गया। आधे से ज्यादा काम भी हो गया। एक जगह एक निजी प्रॉपर्टी आेवरब्रिज के बीच आ गई। यूआईटी को ये काम पहले ही करना चाहिए था पर तब कुछ नहीं किया। आरएसआरडीसी और न्यास ने ओवरब्रिज बनने से पहले सर्वे कर पट्टे शुदा लोगों को कहा भी था कि जिनकी प्रापर्टी बीच में आ रही वो प्रापर्टी सुपुर्द कर मुआवजा ले ले लेकिन तब कोई नहीं आया। जब ब्रिज पास पहुंच गया तो निजी प्रॉपर्टी मालिक ने न्यायालय में केस दायर कर दिया। न्यायालय ने न्यास और आरएसआरडीसी को मामले का निस्तारण करने के लिए कहा था। तब उसकी कोई राशि तय नहीं की गई। जब ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ तब यूआईटी संबंंधित निजी प्रापर्टी की कीमत 16 लाख रुपए आंकी। केस करने के बाद प्रापर्टी मालिक ने यूआईटी और आरएसआरडीसी की मजबूरी का फायदा उठाते हुए जमीन के बदले अच्छे इलाके में जमीन देने की मांग रखी।
16 लाख क़ीमत जमीन के बदले मांगे 1.16 करोड़
प्रशासन पर ओवरब्रिज पूरा करने का दबाव था। यूआईटी ने लालगढ़ में 1800 वर्ग फीट के भूखंड के बदले आनंदम ग्रीन में 1800 वर्ग फीट की जमीन दे दी। प्रापर्टी मालिक को जो भूखंड दिया यूआईटी ने उसकी कीमत 1.16 करोड़ आरएसआरडीसी से मांगी। इतनी कीमत देखकर आरएसआरडीसी के स्थानीय और हेड आफिस के अधिकारी चौंक गए। उन्होंने यूआईटी से पूछा कि आखिर किस दर से 1 करोड 16 लाख रुपए हुए। आनंदम ग्रीन में इस वक्त यूआईडी का डीएलसी रेट 5210 रुपए प्रति वर्ग फीट है। जिससे 1800 वर्गफीट भूखंड की कीमत 93 लाख 78 हजार रुपए होता है। यूआईटी डीएलसी रेट से करीब 23 लाख रुपए ज्यादा मांग रही है। यूआईटी का तर्क है कि जो भूखंड प्रापर्टी मालिक को दिया उसके आसपास नीलामी इसी रेट में हुई है।

