धरना देकर किश्मीदेशरवासियों ने चेताया – समय पर समाधान नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन
दैनिक खबरां। बीकानेर/नोखा। किश्मीदेशर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले रविवार 21 सितंबर को नोखा रोड स्थित माणक गेस्ट हाउस के सामने ग्रामीणों ने एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। धरने में किश्मीदेशर सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों की तादाद में महिलाएं व पुरुष शामिल हुए।
धरने में समिति पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि उनकी पांच सूत्री मांगों पर प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उल्लेखनीय है कि समिति ने ठीक एक वर्ष पूर्व 14 दिन तक अनिश्चितकालीन धरना दिया था। उस समय जिला प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया था कि दो माह के भीतर सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद हालात जस के तस हैं।
समिति की मुख्य मांगे
1. गंदे पानी की निकासी की उचित व्यवस्था।
2. बरसात में गिरे व क्षतिग्रस्त मकानों के लिए सरकारी मुआवजा (न मिलने पर प्रति मकान दो करोड़ रुपये मुआवजा की मांग)।
3. नेशनल हाईवे 89 पर टूटी पुलिया का निर्माण (जिसके कारण दो लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है)।
4. बरसात से क्षतिग्रस्त सड़क व नालियों का पुनर्निर्माण।
5. मोहल्ले के अंदर गलत ढंग से डाली गई सीवरेज लाइन को बदलना।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही से पिछले एक साल में समस्याएं और विकराल हो गई हैं। इस बार सांकेतिक धरने के माध्यम से चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
धरने के दौरान जिला प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की गई। धरना नंदकिशोर गहलोत के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसमें मोहनलाल मेघवाल, लालचंद मेघवाल, एडवोकेट रवि पंडित, राजाराम गहलोत, हजारी देवड़ा, रामलाल गर्ग, फुसारम गर्ग, हनुमान जी गर्ग, सोहन चौधरी, झवरलाल गहलोत, चेनाराम जनागल, पीरदान जनागल, घनश्याम दावा जनागल, सुमित्रा देवी, धनवंती, झुमका देवी, केशर देवी, सुशीला देवी, मीरा देवी, सुनीता देवी, निर्मला देवी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे।

