सादे कागज़ वाले एफिडेविट पर असली आरोपी को छोड़ा, निर्दोष को फंसाया,हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच को बताया पक्षपाती, सुनाया बड़ा फैसला

बीकानेर राजस्थान हनुमानगढ

सादे कागज़ वाले एफिडेविट पर असली आरोपी को छोड़ा, निर्दोष को फंसाया,हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच को बताया पक्षपाती, सुनाया बड़ा फैसला

बीकानेर, दैनिक खबरां । राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में बीकानेर संभाग की हनुमानगढ़ पुलिस की जांच को पक्षपाती, मिलीभगतपूर्ण और अवैधानिक करार देते हुए काका सिंह नामक आरोपी को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने असली आरोपी जितेंद्र सिंह को बचाने के लिए बिना स्टाम्प वाले एक साधारण कागज पर लिखे एफिडेविट को आधार बना लिया और अपने ही कांस्टेबल की गवाही को दरकिनार कर गलत व्यक्ति को जेल भेज दिया। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सुदेश बंसल ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए और कहा कि प्रथम दृष्टया यह पूरा प्रकरण दुर्भावनापूर्ण और छलावे (कैमोफ्लाज) से भरा प्रतीत होता है।

मामला बीकानेर संभाग के हनुमानगढ़ जिले के संगरिया थाना क्षेत्र का है। 24 जून 2024 को नाकाबंदी के दौरान एक युवक मोटरसाइकिल छोड़कर फरार हो गया था। उसी बाइक से 20 किलो डोडा-पोस्त बरामद हुआ। मौके पर मौजूद कॉन्स्टेबल दौलतराम और हरिराम ने भागने वाले युवक की पहचान जितेंद्र सिंह पुत्र मेजरसिंह के रूप में की थी। लेकिन लगभग छह महीने बाद कहानी बदल गई, जब जितेंद्र सिंह ने पुलिस को 2 जनवरी 2024 को एक साधारण, बिना स्टाम्प वाले कागज पर लिखा एफिडेविट दिया, जिसमें लिखा था “भागने वाला मैं नहीं, काका सिंह था।” आश्चर्य की बात यह रही कि पुलिस ने अपने ही कर्मचारियों की गवाही को नजरअंदाज कर इसी हलफनामे को सच मान लिया और जितेंद्र सिंह को केस से बाहर कर दिया, जबकि काका सिंह को आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया।

याचिकाकर्ता काका सिंह के वकील ने कोर्ट में बताया कि यह पूरा खेल असली आरोपी को बचाने और निर्दोष को फंसाने के लिए रचा गया। न तो काका सिंह और न ही जितेंद्र सिंह के बीच किसी प्रकार का कॉल रिकॉर्ड, पैसों का लेन-देन या किसी तरह की साठगांठ का कोई सबूत मिला। काका सिंह का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है और बरामद 20 किलो डोडा-पोस्त कमर्शियल मात्रा से कम है। पुलिस के पास काका सिंह के खिलाफ इस एफिडेविट के अलावा कोई भी ठोस साक्ष्य नहीं था।

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने काका सिंह को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और 25-25 हजार रुपये की दो जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही हनुमानगढ़ एसपी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वर्तमान जांच अधिकारी एसआई लालबहादुर चंद और पूर्व आईओ एसआई जगदीश की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए। यदि जांच में मिलीभगत, लापरवाही या पद के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो दोनों के खिलाफ विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और उसकी अनुपालना रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाए।