नाचना-गाना सीख नहीं पाई तो बन गई क्रिमिनल, नशा तस्कर मंगलामुखी ने रिमांड में बताई हैरान कर देने वाली सच्चाई..

हरियाणा

दैनिक ख़बरां। घरो ने शादी ब्याह का मामला हो या पुत्र होने की ख़ुशी, नाच गा बधाई लेने मंगलामुखी आते हैं और नवविवाहित जोड़े या बच्चे को आशीर्वाद देते हैं। काफी समय से यह प्रथा चली आ रही है। लेकिन रोहतक की एक किन्नर को नाचना गाना आया ही नहीं तो बधाई मांगे कैसे? ऐसे में ठाठबाट की जिंदगी जीने के लिए वो अपराध की राह पर चल पड़ी। अपराध भी ऐसा कि दूसरों की जिंदगी तबाह कर दे। दिल्ली में नाइजीरियन तस्करों से जहर का सामान ड्रग्स लाकर वो शहर में ही बेचने लगी। मंगलामुखी सोनिया ने नशे से जमकर पैसा कमाया। गाड़ी, आभूषण, कपड़े और न जाने क्या क्या जुटाया। हजारों युवकों को नशे में धकेलने के बाद अब पुलिस के हाथ लगी तो जेल जाना पड़ा। पुलिस ने दो दिन का रिमांड लेकर पूछताछ तो यह सब खुलासा हुआ।

पुलिस से मिली जानकारी में पता चला कि दिल्ली से डेढ़ किलो हेरोइन लेकर आ रही मंगलामुखी सोनिया तीन माह पहले ही गिरोह से जुड़ी थी। तीन बार वह गिरोह के साथ माल लेकर आ चुकी थी, लेकिन अबकी बार एवीटी स्टाफ की गिरफ्त में आ गई। वहीं, गिरोह के तीन साथी मोनू, मिचुन व मदन अभी फरार हैं, जो खोखराकोट के ही रहने वाले हैं। पुलिस ने आरोपी सोनिया व ललित को दो दिन के रिमांड के बाद अदालत में पेश किया। दो दिन की रिमांड में पुलिस ने किन्नर से पूछताछ की तो उसके पास कोई आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज तक नहीं मिला। उसे अपनी सही उम्र भी नहीं पता। इस वजह से उसने नशे से की गई कमाई से नई गाड़ी खरीदी, लेकिन गाड़ी कागज नहीं होने पर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर ली गई। पुलिस रिमांड के दौरान भी कोई उससे मिलने के लिए नहीं आया।

पुलिस जांच के दौरान पता चला कि मंगलामुखी का पूरा जीवन परेशानियों में व्यतीत हुआ। एक परिवार में जब मंगलामुखी पैदा हुई तो उसके छह माह का होते ही परिजन उसे रेलवे स्टेशन पर लावारिस छोड़ कर चले गए। उसे नहीं पता उसके मां, बाप कौन हैं। वह किसी तरह जगह जगह आसरा लेकर पली बड़ी । फिर किसी माध्यम से शहर के एक डेरे में रहने लगी। यहां उसे बधाई लेने का काम सिखाया जाने लगा। इस दौरान वह नाचने और गाने में निपुण नहीं हो पाई। उसे बचपन से ही बधाई मांगने और नाचने गाने में ज्यादा शौक नही था । इसकी वजह से वह जहां भी बधाई मांगने जाती तो उसे ज्यादा बधाई भी नहीं मिल पाती थी। इससे वह खुद भी परेशान रहने लगी और डेरे के अन्य किन्नर भी उससे तंग आ गए। फिर वह किसी नशा तस्कर के संपर्क में आई और नशीले पदार्थ लाकर बेचने लगी।

एवीटी स्टाफ इंचार्ज गोर्धन सिंह ने बताया कि सोनिया और ललित से दो दिन के रिमांड के दौरान पूछताछ की गई। अन्य तीन आरोपितों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। सोनिया और उसके साथी पहले भी कई बार नशा लाकर तस्करी कर चुके हैं। पूछताछ में पता चला है कि गिरोह के सदस्य दिल्ली से जब माल लेकर आते हैं तो एक-दूसरे को मेट्रो के पिलर का नंबर बताते हैं। उस नंबर पर दोनों पार्टी कार में पहुंचती हैं। वहां से हाथों-हाथ माल इधर से उधर किया जाता है। इसके अलावा जांच में यह भी पता लगा है कि गिरोह के सदस्य कम मात्रा में माल नहीं बेचते थे। इस कारण वे पुलिस की गिरफ्त में आने से अभी बचे हुए थे। पूछताछ में पता चला है कि गिरोह से तीन युवक और जुड़े हैं, जो उस कार के पीछे-पीछे दूसरी कार में चल रहे थे, जिसमें माल मिला था। मामले की जांच की जा रही है।

गौरतलब है कि रोहतक से दो गाड़ियों में पांच आरोपित मीनू, मदन, नीतिन, ललित और सोनिया दिल्ली में हेरोइन खरीदने गए थे। आरोपितों ने दिल्ली के द्वारका में नाइजीरियन से हेरोइन खरीदी और रोहतक की तरफ चल पड़े। सोनिया अपने ड्राइवर ललित के साथ अलग गाड़ी में आ रही थी, जिसे 25 अक्टूबर की रात को सांपला के पास ही पुलिस ने दबोच लिया था। उसके पास से डेढ किलो हेरोइन बरामद कर ली गई थी। जबकि तीन अन्य आरोपित दूसरी गाड़ी में चकमा देकर फरार हो गए थे। पुलिस ने सोनिया और चालक ललित को दो दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की। अब दोनों को जेल भेज दिया गया है।