खेजड़ी पर वार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई: बीकानेर में 400 से अधिक लोग अनशन पर, देशभर से मिल रहा समर्थन
Bikaner News दैनिक खबरां,बीकानेर। मरुस्थलीय राजस्थान की पहचान और जीवन का आधार मानी जाने वाली खेजड़ी आज अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। विकास की आड़ में सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए हो रही अंधाधुंध खेजड़ी कटाई ने अब जनमानस को आंदोलित कर दिया है। इसी के विरोध में बीकानेर में बिश्नोई धर्मशाला के सामने शुरू हुआ महापड़ाव धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
पर्यावरण, वन्यजीव और मानव जीवन की रक्षा के संकल्प के साथ चल रहे इस महापड़ाव में साधु-संतों के साथ करीब 400 से अधिक पर्यावरण प्रेमी और मातृशक्ति अन्न-जल त्याग कर अनशन पर बैठी हैं। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि मरुस्थल में जीवन का आधार, पशुपालन की रीढ़ और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक है। इसके बावजूद विकास के नाम पर इसका लगातार विनाश भविष्य की पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर रहा है।
आंदोलन से जुड़े लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो सामूहिक अनशन और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा।
महापड़ाव में बिश्नोई समाज के साथ-साथ सर्व समाज के प्रतिनिधि, पर्यावरण कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में महिलाएं सक्रिय रूप से मौजूद हैं। महिलाओं की मजबूत भागीदारी ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी है और यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक समाज का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है।
खेजड़ी बचाओ आंदोलन की गूंज अब बीकानेर तक सीमित नहीं रही। पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से भी लोग पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं। इससे यह साफ होता जा रहा है कि खेजड़ी कटाई का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण चिंता का विषय बनता जा रहा है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि खेजड़ी कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए स्पष्ट और सख्त नियम तय किए जाएं तथा जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। बीकानेर से उठी यह आवाज अब सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बन गई है,कि विकास की रफ्तार के साथ पर्यावरण संतुलन कैसे साधा जाए।

