अस्पताल परिसर में बायो वेस्ट जलवाया,लापरवाही,डीबी अस्पताल परिसर में बायो वेस्ट जलवाया, धुएं से ट्रोमा व वार्डों में भर्ती मरीज रातभर हुए परेशान, संक्रमण का खतरा
चूरू, @dainikkhabraan। हाल ही में मध्यप्रदेश के हमीदिया अस्पताल की आगजनी की घटना से चूरू के डीबी अस्पताल प्रबंधन ने सबक नहीं लिया। मेडिकल कॉलेज से जुड़े राजकीय डीबी अस्पताल परिसर में बायो मेडिकल वेस्ट एवं कचरा केंद्र में आगजनी की घटना से पूरी रात मरीज व उनके परिजन सकते में रहे। आश्चर्य तो इस बात का है कि गुरुवार दोपहर तक अस्पताल प्रबंधन ने कचरे में लगी आग को बुझाने का प्रयास नहीं किया। दोपहर तक कचरे में से धुएं निकलता रहा। रात को बायो वेस्ट जलाने की घटना से वार्डों में भर्ती रोगी रातभर चैन से नहीं सो सके।
धुएं उठने से संक्रमण का खतरा हो गया है। वार्डों के रोगियों व उनके परिजन दोपहर तक असहज रहे। कुछ रोगियों को परेशानी भी हुई। धुआं ट्रोमा सेंटर सहित अस्पताल के कई वार्डों में भर गया। अस्पताल में डेंगू के मरीज भी भर्ती हैं। परिजनों ने बताया कि ट्रोमा सेंटर सहित अस्पताल परिसर में गंदगी फैली हुई है। प्रिसिंपल डॉ. एमएम पुकार ने कहा कि बायो वेस्ट के धुएं से रोगियों को परेशानी होने की सूचना नहीं है। मामला सामने के आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। ट्रोमा वार्ड में भर्ती रोगियों के परिजनों ने कहा कि रात को सांस लेना भी दूभर था।
ट्रोमा से 20 फीट दूर जलाया कचरा मरीज बोले-सांस लेना भी दूभर हुआ
चूरू के वार्ड 15 निवासी फिरोज खान ने बताया कि उनका बेटा जावेद डेंगू के कारण डीबी अस्पताल में भर्ती है। बायो वेस्ट के धुएं से बुधवार को रात भर परेशानी हो रही थी। अस्पताल में सांस लेना भी दूभर हो रहा था।
सादुलपुर से आए सांवरमल ने बताया कि भतीजे की तबीयत खराब होने के कारण उसे डीबी अस्पताल में भर्ती करवा रखा है। बुधवार को ट्रोमा सेंटर के सामने कल कचरे को जलाया गया था। जिसके कारण पूरी रात परेशानी हुई। अस्पताल में सफाई व्यवस्था भी खराब है।
राजलदेसर से आए रफीक मोहम्मद ने बताया कि छोटे भाई की पत्नी के डेंगू है। रातभर परेशान होते रहे। अस्पताल की व्यवस्थाओं पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है।
कचरा जलाने से मरीजों के फेफड़ों में इन्फेक्शन का खतरा
मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि बायो मेडिकल वेस्ट के साथ अन्य कचरे को खुले में जलाया जाना आमजन के लिए बहुत घातक है। इससे संक्रमण खतरा तो रहता है। इसके संपर्क में आने वाले लोगों के फेफड़ों में इंफेक्शन हो सकता है। साथ ही वातावरण प्रदूषण, जल प्रदूषण भी होता है। इसके अलावा पशुओं की मौत का कारण भी बनता है।

