बीकानेर: अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट की सख्ती,निगम आयुक्त से व्यक्तिगत जवाब तलब,नहीं दिया तो कोर्ट में हाज़िरी तय

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बीकानेर में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट की सख्ती, नगर निगम आयुक्त से व्यक्तिगत जवाब तलब,नहीं दिया तो कोर्ट में हाज़िरी तय

दैनिक खबरां,बीकानेर/जोधपुर। बीकानेर में कथित अवैध निर्माण के मामले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर निगम प्रशासन पर कड़ा रुख अपनाया है। जोधपुर स्थित हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नगर निगम बीकानेर के आयुक्त स्वयं व्यक्तिगत शपथपत्र पेश कर यह बताएं कि अवैध निर्माण को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई है और यदि कार्रवाई में देरी हुई है तो उसके क्या कारण रहे। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि यदि शपथपत्र दाखिल नहीं किया गया तो नगर निगम आयुक्त को स्वयं न्यायालय में उपस्थित होना होगा।

यह आदेश न्यायाधीश संजीत पुरोहित ने दौलत राम बनाम महेश्वरी सदन ट्रस्ट प्रकरण में पारित किया है । याचिका में ट्रायल कोर्ट के 12 अगस्त 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आदेश 39 नियम 1 व 2 सीपीसी के तहत दायर अस्थायी निषेधाज्ञा की अर्जी इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि कथित अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम बीकानेर द्वारा कार्रवाई की जा रही है।

हाईकोर्ट को याचिकाकर्ता की ओर से अवगत कराया गया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा जिस कार्रवाई का हवाला दिया गया, वह धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रही है और अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं, नगर निगम की ओर से बताया गया कि अवैध निर्माण के संबंध में कुछ नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन कार्रवाई की वर्तमान स्थिति बताने के लिए समय की आवश्यकता है।


दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने नगर निगम की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए आयुक्त से व्यक्तिगत शपथपत्र तलब किया है। इस आदेश के बाद बीकानेर में अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और प्रशासन पर ठोस कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अवैध निर्माण जैसे गंभीर मामलों में प्रशासनिक उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को तय की गई है।