सुप्रीम कोर्ट के आदेश हवा में! बीकानेर जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल, अब तक नहीं जारी हुए पटाखों पर आधिकारिक निर्देश

बीकानेर बीकानेर जिला प्रशासन

सुप्रीम कोर्ट के आदेश हवा में! बीकानेर जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल, अब तक नहीं जारी हुए पटाखों पर आधिकारिक निर्देश

दैनिक खबरां,बीकानेर(नारायण उपाध्याय)। दीपावली आ गई है आज रूप चतुर्दशी है,लेकिन जिला प्रशासन अब तक गहरी नींद में है। सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बीकानेर जिला कलेक्टर की ओर से अब तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है कि शहरवासी किस श्रेणी के पटाखे चला सकेंगे और किन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने तेज आवाज वाले पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि 125 डेसीबल से अधिक आवाज वाले पटाखों का न तो विक्रय किया जाए और न ही प्रयोग। कोर्ट ने यह भी कहा है कि केवल ग्रीन क्रैकर्स के उत्पादन और उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए ताकि वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण रखा जा सके। अस्पतालों, स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों से 150 मीटर की दूरी के भीतर पटाखे चलाने पर रोक है।


लेकिन अफसोस की बात यह है कि बीकानेर जिला प्रशासन ने अब तक इन निर्देशों को लेकर न तो कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी की है, न ही कोई स्पष्ट गाइडलाइन दी है कि जिले में दीपावली पर क्या चलेगा और क्या नहीं। नतीजा यह है कि आमजन असमंजस में हैं। क्या ग्रीन क्रैकर मिलेंगे? क्या प्रतिबंधित पटाखों पर कार्रवाई होगी? क्या बाजार में बिक रहे तेज आवाज वाले पटाखे वैध हैं?

यह लापरवाही न केवल सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा और जनहित के साथ सीधा खिलवाड़ भी है। सवाल उठता है कि जब अन्य जिलों में प्रशासन ने समय रहते सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं, तो बीकानेर में यह सन्नाटा क्यों? क्या दीपावली पर प्रदूषण नियंत्रण सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा? या फिर जिला कलेक्टर अब भी “सजावट की लाइटों” में उलझे हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर रहे हैं? अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है। दीपावली से पहले या उसके बाद!