आरएसएस के शताब्दी समारोह में मोहन भागवत का संबोधन, स्वदेशी और पड़ोसी देशों की उथल-पुथल पर जताई चिंता
दैनिक खबरां । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के 100 साल पूरे होने पर नागपुर में विजयदशमी उत्सव में संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने लोगों से स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भर जीवन जीने की अपील की। भागवत ने पड़ोसी देशों में जारी हिंसक घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रजातांत्रिक मार्ग ही परिवर्तन का साधन है, हिंसा से केवल अराजकता बढ़ती है।
उन्होंने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 भारतीयों की हत्या की थी, जिसका जवाब सेना ने मजबूती से दिया। साथ ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भी याद किया। संघ प्रमुख ने कहा कि मौजूदा आर्थिक प्रणाली पर पूरी निर्भरता नहीं होनी चाहिए, बल्कि स्वदेशी और स्वावलंबन को बढ़ावा देना होगा। अमेरिका की टैरिफ नीति का असर पूरी दुनिया झेल रही है।
भागवत ने गुरु तेग बहादुर, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर श्रद्धांजलि दी और कहा कि भौतिक विकास के साथ नैतिक विकास भी ज़रूरी है। उन्होंने चेताया कि हिमालय की बदलती स्थिति और बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं चेतावनी की घंटी हैं। भागवत ने कहा कि दुनिया भारत से उम्मीद कर रही है कि वह “सभी का कल्याण करने वाले धर्म और मानवता की दृष्टि” दे। समाज के आचरण में बदलाव लाकर ही सही व्यवस्था और विकास संभव है।

