आज ही मनाई जाएगी दीपावली, लक्ष्मीपूजन का जानिए दिन से रात तक के श्रेष्ठ मुहूर्त्त और पूजन काल, पूरी विधि आरती सहित..

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आज ही मनाई जाएगी दीपावली, लक्ष्मीपूजन का जानिए दिन से रात तक के श्रेष्ठ मुहूर्त्त और पूजन काल, पूरी विधि आरती सहित..

दैनिक खबरां,बीकानेर। इस वर्ष दीपावली का पावन पर्व सोमवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस बार तिथि को लेकर कोई भ्रम नहीं है। शास्त्री पं जयनारायण उपाध्याय के अनुसार, आज दोपहर 2 बजकर 27 मिनट पर अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी, जो 21 अक्टूबर मंगलवार दोपहर 3 बजकर 56 मिनट तक रहेगी।
क्योंकि आज प्रदोषकाल और मध्यरात्रि दोनों में अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए लक्ष्मीपूजन आज सोमवार को ही किया जाएगा।


तीन काल माने गए सर्वश्रेष्ठ — प्रदोष, वृष और सिंह लग्न

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए तीन काल को विशेष रूप से शुभ माना गया है —
1️⃣ प्रदोषकाल, जो सूर्यास्त के लगभग 72 मिनट बाद तक रहता है।
2️⃣ वृष लग्न, जो स्थिर लग्न है और पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
3️⃣ सिंह लग्न, जो रात्रि में लक्ष्मी साधना के लिए अनुकूल होता है।

पं उपाध्याय के अनुसार, प्रदोषकाल और वृष लग्न दोनों का संयोग जब बनता है, वह समय वर्ष का सबसे शुभ मुहूर्त्त माना जाता है।


आज के श्रेष्ठ पूजन मुहूर्त्त

शाम 07:20 से 08:13 तक — प्रदोषकाल और वृष लग्न का संयोग
शाम 07:29 से 07:40 तक — स्थिर वृष लग्न में सिंह नवांश
शाम 08:06 से 08:18 तक — स्थिर वृष लग्न में वृष नवांश

रात्रिकालीन लक्ष्मीपूजन के विशेष मुहूर्त्त

प्रदोष काल: शाम 05:49 से 08:13 तक
वृष लग्न: शाम 07:20 से 09:16 तक
सिंह लग्न: रात्रि 01:50 से 04:07 तक
निशीथ काल: रात 11:46 से 12:37 तक
मिथुन लग्न: रात 09:16 से 11:30 तक
कन्या लग्न: सुबह 04:07 से 06:22 तक

रात्रि के शुभ चौघड़िया

चर: शाम 05:49 से 07:23 तक
लाभ: रात 10:37 से 12:12 तक
शुभ: रात 01:46 से 03:21 तक
अमृत: रात 03:21 से 04:55 तक

व्यापारिक प्रतिष्ठानों व दुकानों के लिए दिन के श्रेष्ठ मुहूर्त्त

दीपावली का दिन व्यापारियों और दुकानदारों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंडित उपाध्याय ने बताया कि इस दिन नए बहीखातों की पूजा, तिजोरी पूजन और व्यापार आरंभ के लिए नीचे दिए गए मुहूर्त्त अत्यंत शुभ रहेंगे

अभिजीत मुहूर्त्त: सुबह 11:49 से 12:34 तक
अमृत चौघड़िया: सुबह 06:31 से 07:57 तक
शुभ चौघड़िया: सुबह 09:20 से 10:46 तक
लाभ चौघड़िया: दोपहर 03:03 से 04:28 तक
अमृत चौघड़िया: शाम 04:28 से 05:54 तक
धनु लग्न: सुबह 10:59 से 01:05 तक
कुंभ लग्न: दोपहर 02:49 से 04:18 तक
मीन लग्न: शाम 04:18 से 05:44 तक

देशभर के प्रमुख शहरों के पूजन काल

शहर प्रदोष काल वृष लग्न

दिल्ली 05:44 से 08:08 तक 07:09 से 09:05 तक
वाराणसी 05:22 से 07:54 तक 06:51 से 08:48 तक
जयपुर 05:49 से 08:13 तक 07:20 से 09:16 तक
मुंबई 06:10 से 08:34 तक 07:43 से 09:42 तक


लक्ष्मीपूजन का महत्व और परंपरा

दीपावली के दिन माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु और श्री गणेश की पूजा का विशेष विधान है। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोषकाल या स्थिर वृष लग्न में की गई पूजा से धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पं. उपाध्याय के अनुसार, जो लोग किसी कारणवश शाम के समय पूजा नहीं कर पाते, वे निशीथ काल (मध्यरात्रि) में भी पूजन कर सकते हैं। यह काल भी लक्ष्मी साधना के लिए शुभ माना गया है।

पूजन विधि संक्षेप में

दीपावली की रात्रि को घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाएं, तिजोरी या पूजन स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। चांदी या मिट्टी की लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाओं का विधिपूर्वक पूजन करें।
धूप, दीप, पुष्प, चावल, हल्दी, कुंकुम, मिठाई और पंचामृत से आराधना करें। पूजा के अंत में कुटुंब की सुख-समृद्धि और देश की उन्नति की कामना करें।

मां लक्ष्मी जी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥

ऊँ जय लक्ष्मी माता…

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ऊँ जय लक्ष्मी माता…

द्रवित अन्न प्रदान करे, तुम धन की दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि पाता॥
ऊँ जय लक्ष्मी माता…

तुम पतिव्रता रूपिणी, तुम्हें सब विधि भाता।
भक्तन के दुःख हरने, सदा सुखदाता॥
ऊँ जय लक्ष्मी माता…

जो तुम्हें नित ध्यावत, मनवांछित फल पाता।
तुम बिन यज्ञ न होय, तुम्हें सब विधि भाता॥
ऊँ जय लक्ष्मी माता…

भूषण चंदन सुगंधित, हरि मंदिर शोभाता।
रत्न सिंहासन विराजत, लखि देख मन रमता॥
ऊँ जय लक्ष्मी माता…

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता॥
ऊँ जय लक्ष्मी माता…

शास्त्री पं जयनारायण उपाध्याय का कहना है कि प्रदोषकाल और वृष लग्न में किया गया लक्ष्मीपूजन, वर्ष भर धन, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि करता है।
उन्होंने कहा कि यह पर्व न केवल रोशनी का, बल्कि सद्भाव, संस्कार और सकारात्मकता के प्रसार का प्रतीक है।