बीकानेर अनाज मंडी में नई मूंगफली की आवक, व्यापारियों में उत्साह लेकिन सुविधाओं का टोटा, देखें वीडियो..

बीकानेर

बीकानेर अनाज मंडी में नई मूंगफली की आवक, व्यापारियों में उत्साह लेकिन सुविधाओं का टोटा, देखें वीडियो..

दैनिक खबरां,बीकानेर। गंगानगर रोड स्थित नई अनाज मंडी में इस सीजन की नई मूंगफली की आवक शुरू हो गई है। फिलहाल प्रतिदिन लगभग 2000 बोरी मूंगफली की आमद दर्ज की जा रही है। सोमवार को हुए ऑक्शन में मूंगफली 4300 से 6150 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी। नई फसल के आने से मंडी में रौनक बढ़ गई है और व्यापारियों के चेहरों पर उत्साह झलक रहा है।

दामों में बढ़ोतरी की संभावना
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मूंगफली के दामों में मजबूती देखने को मिल सकती है। इसका बड़ा कारण यह है कि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 7263 रुपये प्रति क्विंटल तय कर रखा है। ऐसे में किसानों के सामने यह असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि वे अपनी उपज को सरकार को बेचें या फिर मंडी में व्यापारियों को। किसान मंडी में तुरंत भुगतान की सुविधा को प्राथमिकता देते हैं, जबकि सरकारी खरीद में अक्सर देर होती है।

एक्सपोर्ट डिमांड में तेजी
बीकानेर की मूंगफली की मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बनी रहती है। गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु और कोलकाता जैसे बड़े राज्यों में आपूर्ति के साथ-साथ बीकानेर की मूंगफली अफगानिस्तान, यूनाइटेड अरब अमीरात, नेपाल, चीन, बांग्लादेश, वियतनाम और यूरोपियन देशों में निर्यात की जाती है। इस बार एक्सपोर्ट डिमांड में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को फायदा होगा।

मंडी प्रशासन पर सवाल
हालांकि मंडी में व्यापार बढ़ने के साथ ही सुविधाओं की कमी भी साफ तौर पर झलक रही है। किसानों और व्यापारियों ने आरोप लगाया कि मंडी में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव है। जो शौचालय बने भी हैं, उन पर मंडी कर्मचारियों ने ताले जड़ रखे हैं। ऐसे में किसानों और मजदूरों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
किसानों का कहना है कि मंडी प्रशासन प्रतिदिन लाखों रुपये का राजस्व अर्जित करता है, लेकिन सुविधा देने में पूरी तरह नाकाम है। किसानों और व्यापारियों ने मांग की है कि मंडी प्रशासन तुरंत मूलभूत व्यवस्थाओं में सुधार करे ताकि मंडी में आने वाले हजारों लोगों को राहत मिल सके।नई मूंगफली की आवक से जहां व्यापारियों में उत्साह है, वहीं किसानों की निगाहें सरकार की खरीद नीति और मंडी प्रशासन की व्यवस्थाओं पर टिकी हुई हैं। देखें वीडियो..