गोचर पर सरकार का दावा संदिग्ध! 40 हजार बीघा के आंदोलन में आधी जमीन गायब : नितिन वत्स

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गोचर पर सरकार का दावा संदिग्ध, 40 हजार बीघा के आंदोलन में आधी जमीन गायब : नितिन वत्स


Bikaner News बीकानेर, दैनिक खबरां। बीकानेर की गोचर भूमि को लेकर भाजपा सरकार द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता नितिन वत्स ने कहा है कि सरकार का फैसला जितना बताया जा रहा है, उतना साफ और पारदर्शी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोचर आंदोलन के नाम पर बीकानेर की जनता को भ्रम में रखा गया और वास्तविक आंकड़े छिपाए जा रहे हैं। नितिन वत्स ने कहा कि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारीलाल विश्नोई ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि 5418 हेक्टेयर गोचर भूमि में कोई छेड़छाड़ नहीं होगी, लेकिन जब इस भूमि को बीघा में बदला गया तो यह आंकड़ा करीब 21,400 से 21,500 बीघा ही बैठता है। जबकि बीकानेर में चला गोचर आंदोलन 40 हजार बीघा गोचर भूमि बचाने के नाम पर हुआ था।


उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार का दावा सही है तो फिर बाकी 15 से 18 हजार बीघा गोचर भूमि कहां चली गई? नितिन वत्स के अनुसार गौ आंदोलन से जुड़े अग्रणी गौ सेवकों ने बताया कि विश्वविद्यालय और जीएसएस जैसी संस्थाओं पर पहले से 2 से 2.5 हजार बीघा भूमि उपयोग में है। इसे यदि 3 हजार बीघा भी मान लिया जाए, तब भी करीब 15 से 16 हजार बीघा गोचर भूमि का कोई स्पष्ट हिसाब सरकार के पास नहीं है।


कांग्रेस नेता ने कहा कि या तो आंदोलन की शुरुआत में 40 हजार बीघा गोचर का आंकड़ा जनता को गुमराह करने के लिए बताया गया, या फिर सरकार ने अपने फैसले में बड़ी मात्रा में गोचर भूमि को अपने नाम कर लिया और अब इसे गोचर की जीत बताकर प्रचारित किया जा रहा है।
नितिन वत्स ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में सरकार और गोचर आंदोलन के कुछ अग्रणी चेहरों के बीच अंदरखाने समझौते की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बीकानेर की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि सरकार ने कुल कितनी भूमि अपने नियंत्रण में ली और वास्तव में कितनी भूमि गोचर के रूप में छोड़ी गई।


उन्होंने मांग की कि सरकार पूरे भूमि विवरण को सार्वजनिक करे, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके। नितिन वत्स ने कहा कि यह मामला केवल जमीन का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और पारदर्शिता का है। सवाल उठ चुके हैं और अब सरकार को जवाब देना ही होगा।