राजस्थान में फर्जी कंपनी बनाकर तीन हजार निवेशकों से की 100 करोड़ की ठगी,अब तक एक महिला सहित 12 लोग गिरफ्तार..

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राजस्थान में फर्जी कंपनी बनाकर तीन हजार निवेशकों से की 100 करोड़ की ठगी,अब तक एक महिला सहित 12 लोग गिरफ्तार..

दैनिक ख़बरां। राजस्थान में फर्जी कंपनी बनाकर निवेशकों से 100 करोड़ की ठगी करने का मामला सामने आया है। कंपनी ने कोटा, बूंदी,बारां, झालावाड़ के करीब ढाई से 3 हजार निवेशकों से करीब 100 करोड़ की ठगी की। इसी साल जनवरी में कंपनी के 38 डायरेक्टर्स के खिलाफ गुमानपुरा थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। वर्तमान में कंपनी के डायरेक्टर्स के खिलाफ शहर के अलग-अलग थानों में करीब 105 से ज्यादा मामले दर्ज है। SIT टीम अब तक एक महिला समेत 12 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।


इस मामले में SIT की टीम ने एक ओर आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच के बाद टीम ने मंडाना के नायब तहसीलदार ललित नागर को पकड़ा है। ललित नागर ने अपनी पत्नी को अपेक्षा ग्रुप में डायरेक्टर बना रखा था। खुद डमी डायरेक्टर के रूप में पर्दे के पीछे से काम करता था।

दरअसल, बारां निवासी मुरली मनोहर नामदेव ने अपेक्षा ग्रुप के नाम से कंपनी खोली थी। चिटफंड कंपनी बनाकर रुपए दोगुना करने का झांसा दिया। उसने कंपनी कई लोगों को डायरेक्टर बनाया। फिर एक कम्पनी से 12 से 14 कम्पनियां खड़ी की। फिर लोगों को अमीर बनने के सपने दिखाकर उनसे ठगी की।

कंपनी का भंडाफोड़ उस समय हुआ जब नवबंर 2021 में कंपनी ने अपने ग्राहकों को ब्याज देना बंद कर दिया था। लोगों ने कंपनी के ऑफिस में संपर्क किया तो उन्हें लगातार टाला जाने लगा। लोगों को एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है। इसके बाद पीड़ित लोग कंपनी के खिलाफ थाने में शिकायत देने पहुंचने लगे।

बताया जा रहा है 50 आरोपियों में 17 महिलाओं के नाम शामिल है। जो कंपनी में नाम की डायरेक्टर थी। पर्दे के पीछे से डमी डायरेक्टर के तौर उनके पति सारा काम देखते थे। पुलिस ने 7 आरोपियों की गिरफ्तार पर फरार आरोपियों पर कुल 40 हजार का इनाम घोषित कर रखा था। इनमें से 2 डायरेक्टर को SIT को गिरफ्तार कर चुकी है।

इनकी हुई गिरफ्तारी
SIT टीम कंपनी डायरेक्टर संजय कश्यप, दुर्गाशंकर मेरोठा, गिर्राज नायक, CA हिमांशु विजय, लटूरी सांगोद कानूनगो प्रदीप जैन, बारां में शिक्षा विभाग में वरिष्ठ सहायक पद पर तैनात दिनेश गुप्ता, सूर्यकांत गुप्ता, योगेश, मंडाना नायब तहसीलदार ललित नागर, हरिओम सुमन, हरिओम सुमन की पत्नी शोभा, कंपनी CMD मुरली मनोहर नामदेव की गिरफ्तारी हो चुकी है।

CI और ASI हो चुके सस्पेंड
पुलिस हिरासत से आरोपियों को रजिस्ट्री ऑफिस भेजकर कंपनी की प्रॉपटी नाम करवाने में मदद करने के आरोप में तत्कालीन गुमानपुरा CI लखन लाल मीणा और ASI रिहाना पर गाज गिरी थी। मामला सामने आने के बाद SP ने दोनों को सस्पेंड किया था और मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था। SIT के गठन के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी का दौर शुरू हुआ था।

सपने दिखाकर मालामाल हुई कंपनी
अपेक्षा ग्रुप के निदेशक मुरली मनोहर नामदेव ने साल 2012 में कंपनी शुरू की थी। पहले बारां में लोगों को रकम दोगुनी करने के जाल में फंसाया। फिर अन्य जिलों में अपना नेटवर्क बिछाया। साल 2012 से 2016 तक पार्टनरशिप फर्म में काम किया। साल 2017 में 2 कंपनियां बनाई। फिर 12 कंपनियां बना ली। कंपनी ने कोटा के एरोड्राम सर्किल स्थित आकाश मॉल में ऑफिस खोला। नेटवर्क के जरिए लोगों को जल्द अमीर बनने के सपने दिखवाकर इंवेस्ट करवाया। कंपनी मालामाल होती गई,निवेशकों के करोड़ों डूब गए।

SC की जमीन खरीदी
कंपनी सीएमडीने सीए हिमांशु विजय को सलाहकार के रूप में कंपनी में शामिल किया। जो कंपनी का पूरा काम देखता था। SC की जमीन खरीदने से लेकर, उनके सौदे करना हिमांशु के जिम्मे था। कंपनी ने SC की खरीदी हुई जमीनों का कन्वर्जन भी नहीं करवाया।

दो तरीके से करवाते इंवेस्ट
कंपनी लुभावने ऑफर के जरिए लोगों को ग्राहक बनाती थी। कंपनी ने दो तरह से लोगों से निवेश करवाया। निवेश के बदले लोगों को प्लॉट की फाइल बतौर सिक्योरिटी देते थे। इसके अलावा 3 साल में पैसे दोगुना करने का झांसा देते थे। निवेशक से बकायदा इसका स्टांप पर एग्रीमेंट करते थे। कंपनी के लुभावने ऑफर के मायाजाल में हजारों लोग फंसते चले गए।

बड़ी होटलों में पार्टी करते, ऑफर देकर लुभाते
साल 2017 में अपेक्षा ग्रुप नाम से एक कंपनी रजिस्टर्ड करवाई गई। कंपनी में कुल 38 लोगों का रजिस्ट्रेशन है। इनमें महिलाएं भी शामिल है। 16 लोग स्थायी रूप से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर है। कंपनी के डायरेक्टर हर महीने शहर की बड़ी होटलों में पार्टी करते थे। पार्टी में कंपनी के डायरेक्टर्स ड्रेस कोड में रहते थे।

नेटवर्क के जरिए लोगों को निशाना बनाया
कंपनी ने एजेंट्स के जरिए अपने ऑफर लोगों तक पहुंचाए। 3 प्रतिशत दर से ब्याज और पैसे दोगुनी करने के ऑफर दिए। कंपनी का व्यक्ति निवेशकों के घर ब्याज के पैसे देकर आता था। जिससे लोगों के बीच कंपनी का विश्वास बढ़ता चला गया। इस कारण लोग आकर्षित होते चले गए। कंपनी के इस जाल का न सिर्फ नासमझ लोग शिकार बने बल्कि सरकारी नौकरी वाले हजारों लोगों ने भी कंपनी में निवेश किया। लोगों ने 1 लाख से लेकर 30-40 लाख रुपए तक निवेश किए हुए है।