मेडिकल कॉलेज को मिली साल में दूसरी बॉडी:94 वर्षीय बुजुर्ग के निधन के बाद परिजनों ने अंतिम इच्छा पूरी की, 35 किमी दूर से देह को लेकर पहुंचे, बूंदी से पहला देहदान
कोटा मेडिकल कॉलेज में इस साल दूसरा देहदान हुआ है। बूंदी के रानी की बावड़ी निवासी पुरुषोत्तम शर्मा (94) के निधन के बाद शनिवार को देहदान की सभी प्रक्रिया पूरी की गई। परिजन, 35 किलोमीटर दूर बूंदी जिले से एम्बुलेंस में देह लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जहां जांच प्रक्रिया के बाद एनोटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ प्रतिमा जायसवाल को देह सौपी। उसके बाद परिजनों को देहदान का सर्टिफिकेट सौंपा गया। डॉ प्रतिमा जायसवाल ने बताया कि इस साल मेडिकल कॉलेज में साल का दूसरा देहदान मिला है। जबकि बूंदी जिले से पहला देहदान मिला है।

परिजनों ने अंतिम इच्छा पूरी की
मृतक दोहिते जय कुमार शर्मा ने बताया कि उनके नाना ने रिटायर्ड टीचर थे। RSS से जुड़े थे। सामाजिक कार्यों में हमेशा आगे रहे। साल 2007 में उन्होंने देहदान की इच्छा जाहिर की थी। 27 अप्रैल 2013 में मेडिकल कॉलेज में रजिस्ट्रेशन करवाया था। उनकी इच्छा थी कि मौत के बाद देह मेडिकल स्टूडेंट्स के रिसर्च में काम आ सके। शुक्रवार रात साढ़े 9 बजे उनका देहांत हुआ था। उनकी इच्छानुसार देहदान की प्रक्रिया के मेडिकल कॉलेज में सम्पर्क किया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एम्बुलेंस की व्यवस्था करवाई। RTPCR टेस्ट सहित अन्य जांचों के बाद देहदान की प्रक्रिया पूरी की।
अब तक 37 देहदान मिल चुकी
कोटा मेडिकल कॉलेज को अब तक 37 देहदान मिल चुकी। साल 2020 में 4 देहदान हुए थे। जनवरी में 2, फरवरी व जून में 1-1 देहदान मिली थी। कोरोना काल में 13 माह बाद इसी साल जुलाई महीने में पहला देहदान हुआ था। जिसके 4 माह बाद ये दूसरा देहदान मिला है। डॉ. जायसवाल ने बताया कि कॉलेज में 250 सीट हो गई है। PG स्टूडेंट्स की संख्या भी बढ़ गई है। ऐसे में मेडिकल स्टूडेंट को प्रैक्टिकल के लिए हर साल 10 से 15 देह की आवश्यकता होती है। लेकिन दो या तीन देहदान होता है। लोगों को देहदान के क्षेत्र में कार्य कर लोगों को मोटिवेट करना चाहिए। मेडिकल कॉलेज से सम्बंद्ध सभी हॉस्पिटल के अधीक्षक के पास रजिस्ट्रेशन फार्म उपलब्ध है। मेडिकल कॉलेज का ही रजिस्ट्रेशन मान्य होता है।

