होलिका दहन पर बनेंगे ये तीन शुभ योग, लोगों को होगी इन फलों की प्राप्ति…..
होली का शुभ दिन जल्द ही आ रहा है। होली पर होलिका दहन के लिए अभी से तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस दिन गुरु ग्रह की दृष्टि संबंध चंद्रमा से होने से गजकेसरी योग का निर्माण होगा। इसके साथ ही वरिष्ठ और केदार योग भी बनेंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम गौड़ के अनुसार के अनुसार, होलिका दहन पर ये तीन शुभ योग पहली बार बनने जा रहे हैं। होलिका दहन पर ग्रहों की स्थिति से शत्रुओं पर विजय और रोगों से मुक्ति मिलेगी।
होली एक ऐसा त्योहार है, जिसका इंतजार हर किसी को रहता है। ये त्योहार हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को पड़ता है। होली से ही बसंत ऋतु का आगमन हो जाता है। होलिका दहन के अगले दिन होली मनाई जाती है और लोग एक-दूसरे को रंग-अबीर लगाते हैं।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
होलिका दहन इस साल गुरुवार, 17 मार्च 2022 को किया जाएगा. होलिका दहन की पूजा का शुभ मुहूर्त 9 बजकर 20 मिनट से 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। ऐसे में लोगों को होलिका दहन की पूजा के लिए लगभग एक घंटे का ही समय मिलेगा। होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में सूर्यास्त के बाद करना चाहिए लेकिन अगर इस बीच भद्राकाल हो तो होलिका दहन नहीं करना चाहिए। भद्राकाल समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना चाहिए। हिंदू शास्त्रों में भद्राकाल को अशुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि भद्राकाल में किया गया कोई भी काम सफल नहीं होता और उसके अशुभ परिणाम मिलते हैं।
होली से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक असुर राजा था। उसने घमंड में चूर होकर खुद के ईश्वर होने का दावा किया था। इतना ही नहीं, हिरण्यकश्यप ने राज्य में ईश्वर के नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी लेकिन हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर भक्त था। वहीं, हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को आग में भस्म न होने का वरदान मिला हुआ था। एक बार हिरण्यकश्यप ने होलिका को आदेश दिया कि प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए लेकिन आग में बैठने पर होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गया और तब से ही ईश्वर भक्त प्रह्लाद की याद में होलिका दहन किया जाने लगा।
होलिका दहन में भद्रा टाली जाती
होली का दहन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की प्रदोष व्यापनी पूर्णिमा को भद्रा रहित शास्त्र सम्मत होता है। इस बार फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी गुरुवार 17 मार्च 2022 तक रहेगी, जो दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर पूर्णिमा प्रारम्भ होगी, जो अगले दिन शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगी।
अतः प्रदोष काल में पूर्णिमा होने के कारण 17 मार्च को होली का पर्व मनाया जाएगा किन्तु इस दिन भद्रा दोपहर 1:30 से रात 1-09 बजे तक रेहेगी शास्त्रानुसार होलिका दहन में भद्रा टाली जाती है किंतु भद्रा का समय यदि निशिदकाल के बाद चला जाता है तो होलिका दहन भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा पुच्छ्काल या प्रदोषकाल में करना श्रेष्ठ होता है। इस बार होलिका का दहन भद्रा की पुच्छकाल में रात 9:02 से 10:14 बजे तक करना शास्त्र सम्मत रहेगा।

