प्रकृति का संरक्षण एवं संवर्धन मानव समाज के लिए आवश्यक : कुलपति प्रो. अम्बरीष शरण विद्यार्थी
बीकानेर, @dainikkhabraan। बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय में आज उत्तराखण्ड के लोक पर्व हरेला के पर्व को विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण कर मनाया गया। इस पर्व के उपलक्ष्य में बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अम्बरीष शरण विद्यार्थी, निदेशक अकादमिक डॉ. यदुनाथ सिंह एवं विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिकारियों द्वारा पौधारोपण किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विद्यार्थी ने हरेला पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हरेला का अर्थ हरियाली से है इस दिन सुख समृद्धि और ऐश्वर्य की कामना की जाती है। ऋग्वेद में भी हरियाली के प्रतीक हरेला का उल्लेख किया गया है।
देहरादून: उत्तराखंड में सुख, समृद्धि और खुशहाली का पर्व हरेला हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं, हरेला पर्व के साथ ही श्रावण मास की शुरुवात हो जाती हैं। हरेला पर्व पर्यावरण संरक्षण का त्यौहार है। ऋग्वेद में भी हरियाली के प्रतीक हरेला का उल्लेख किया गया है। ऋग्वेद में लिखा गया है कि इस त्यौहार को मनाने से समाज कल्याण की भावना विकसित होती है। आज का युवा जिस तरह से पुराने त्योहारों को भूलता चला जा रहा है उस बीच हरेला त्यौहार की प्रसिद्धि आज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम भी कर रही है। ऐसे त्यौहार अगर समय-समय पर मनाते जाएं तो युवा भी अपनी संस्कृति के प्रति रुझान करेंगे और युवा पीढ़ी भविष्य में इसके महत्व को भी समझ सकेगी।
उन्होंने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि पौधारोपण हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है, हमें अपने जीवन में जितना हो सके उतना अधिक से अधिक पौधारोपण करना चाहिये। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधों की कमी से निरंतर पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए पौधारोपण बहुत जरूरी है। हम सभी का फर्ज बनता है कि पृथ्वी की खूबसूरती को बनाए रखने में अपना योगदान दें। उन्होंने युवाओं को अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की। प्रकृति समस्त जीवों के जीवन का मूल आधार है। प्रकृति का संरक्षण एवं संवर्धन सभी जीव जगत के लिए बेहद ही अनिवार्य है। प्रकृति पर ही पर्यावरण निर्भर करता है।
यदि प्रकृति असन्तुलित होगी तो पर्यावरण भी असन्तुलित होगा और अकाल, बाढ़, भूस्खलन, भूकम्प आदि अनेक प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं कहर ढाने लगेंगी। प्राकृतिक आपदाओं से बचने और पर्यावरण को शुद्ध बनाने के लिए पेड़ों का होना बहुत जरूरी है। पेड़ प्रकृति का आधार हैं। पेड़ों के बिना प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

निदेशक अकादमिक डॉ. यदुनाथ सिंह ने कहा की वृक्ष एक तरह से संतान की तरह ही मानव की उम्रभर सेवा करते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। यदि प्रकृति को ईश्वर का दूसरा रूप कहा जाए तो कदापि गलत नहीं होगा। पेड़ों पर प्रकृति निर्भर करती है। पेड़ लगाना प्रकृति का संरक्षण व संवर्धन है और प्रकृति का संरक्षण व संवर्धन ईश्वर की श्रेष्ठ आराधना है। एक पेड़ लगाने से असंख्य जीव-जन्तुओं के जीवन का उद्धार होता है और उसका अपार पुण्य सहजता से हासिल होता है। एक तरह से पेड़ लगाने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। भारतीय संस्कृति में भी वृक्षारोपण को अति पुण्यदायी माना गया है। शास्त्रों में लिखा गया है कि एक पेड़ लगाने से एक यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है। पद्म पुराण में तो यहां तक लिखा है कि जलाशय (तालाब/बावड़ी) के निकट पीपल का पेड़ लगाने से व्यक्ति को सैंकड़ों यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। केवल इतना ही नहीं भारतीय संस्कृति में एक पेड़ लगाना, सौ गायों का दान देने के समान माना गया है।


