“लिखा-गालों जैसी नहीं सड़कों जैसी सड़क ही चाहिए,” पेंटिंग बनाकर विरोध: टूटी सड़कों पर चित्रकारी से कटाक्ष….

बीकानेर

टूटी सड़कों पर चित्रकारी से कटाक्ष; लिखा-गालों जैसी नहीं सड़कों जैसी सड़क ही चाहिए

Bikaner, @dainikkhabraan। शहर के हर कोने की सड़कें टूटी पड़ी हैं। इतने गड्‌ढों हैं कि वाहनों से निकलना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। जबकि सरकार के मंत्री बेतुके बयान देकर जनता के दर्द को बढ़ा रहे हैं। पिछले दिनों राज्यमंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने बयान दिया था कि कैटरीना के गालाें जैसी सड़कें बनाएंगे। यह बयान पूरे प्रदेश की जनता के दर्द काे और बढ़ाने लगा। शहर के चित्रकाराें ने इसका विरोध जताने के लिए नायाब तरीका निकाला।

चित्रकारों ने शुक्रवार को हमें गालाें जैसी नहीं सड़काें जैसी सड़क चाहिए, जनाब अभियान शुरू किया। शुक्रवार को इसकी शुरुआत नत्थूसर गेट के अंदर से की। ऐतिहासिक तीन दरवाजों के सामने सड़क कहीं नजर नहीं आ रही थी। बड़े-बड़े गड्‌ढों के बीच से प्रतिदिन हजारों लोग निकल रहे हैं लेकिन प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है।

लोकनायक शहीद भगत सिंह संस्थान के कार्यकर्ताओं ने रंग व कूची से गड्‌ढों को दैत्य का रूप दिया। गड्‌ढे ही उनकी आंख, मुंह, कान, नाक बने यानी कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमें गड्‌ढे ना हों।

स्लोगन भी लिखे कि हमें गालों जैसी नहीं सड़कों जैसी सड़क ही चाहिए। सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले इस अनोखे विरोध प्रदर्शन को देखने के लिए काफी संख्या में शहरवासी पहुंचे। राहगीरों ने रुककर कहा कि शायद ऐसे विरोध प्रदर्शन से प्रशासन का ध्यान आकर्षित हो और वे बदहाल सड़कों की सुध ले।

पैचवर्क की क्वालिटी पर भी कटाक्ष
वहां कुछ जगह पैचवर्क भी किए गए थे। उन पर कलाकारों ने लिखा थूक का चेपा। यानी केवल खानापूर्ति के लिए सड़कों के घाव पर मरहम का प्रयास। पैचवर्क अगर कराए तो ऐसे हों जो लंबे समय तक चले। केवल बिल बनने तक टिकने वाले पैचवर्क पर भी कलाकारों ने अपना रोष जताया।

एक महीने चलेगा अभियान
कलाकार मोना सरदार डूडी व मुकेश सांचीहर ने बताया कि यह अभियान पूरे शहर में एक महीने तक चलेगा। सरकार व प्रशासन का शहर की हर बदहाल सड़क पर ध्यान आकर्षित करने के लिए उनकी टीम प्रतिदिन ऐसे आयोजन करती रहेगी। टीम में पेंटर धर्मा, किशन पुरोहित व संस्थान के अध्यक्ष राजकुमार राजपुरोहित भी शामिल थे।