किन्नर ने बधाई की रकम से कराई 100 शादियां, जरूरतमंद लड़कियों को खुद ढूंढती है नीतू मौसी, एक मंडप में होते हैं फेरे और निकाह
भरतपुर की किन्नर नीतू मौसी हर साल 10 गरीब लड़कियों की शादी करवाती हैं। इस बार भी मंगलवार को 10 गरीब लड़कियों की शादी करवाई। यह 10वां मौका है, जब इस प्रकार का विवाह समारोह नीतू मौसी की ओर से कराया गया है। इस विवाह समारोह की खास बात यह है कि यहां किसी भी धर्म या जाति का बंधन नहीं है। यानी एक ही मंडप में फेरे भी कराए जाते हैं और निकाह भी पढ़ा जाता है। इस बार भी ऐसा ही किया गया।
विवाह समारोहों में किन्नर नीतू मौसी बधाई लेने के लिए पूरे भरतपुर जाती हैं। इसी बधाई में जितनी रकम मिलती है, उन्हें अपने सामूहिक विवाह समारोह के लिए इकट्ठा कर लेती हैं। फिर साल में एक बार 10 ऐसी लड़कियों का चुनाव करती हैं, जिनके परिवार उनका शादी कराने में सक्षम नहीं होते। यानी सक्षम परिवारों के विवाह की बधाई की कमाई गरीब लड़कियों की शादी कराने में खर्च कर देती हैं।
ऐसे करती हैं शादी के लिए लड़कियों का चयन
किन्नर नीतू ने बताया कि वह जब विवाह समारोहों में जाकर बधाई गाती हैं, उसी दौरान आते-जाते सब पर नजर रखती हैं। ध्यान रखती हैं कि कोई गरीब लड़की या परिवार ऐसा तो नहीं, जिनके घर-परिवार सक्षम नहीं हों और बेटी की शादी कर पाने में पैसे के कारण दिक्कत हो। उन पर नजर रखते हुए समय पर संपर्क भी खुद ही कर लेती हैं। इसके अलावा अब बहुत से परिवार यह जान गए हैं कि वे सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करती हैं, इसलिए वे खुद ही संपर्क कर लेते हैं। शादी करवाने के लिए आई लड़कियों और उनके परिजनों के बारे में छानबीन की जाती है। इनमें से सबसे जरूरतमंद का चुनाव कर लिया जाता है।

समारोह में 20 लाख का खर्च
किन्नर नीतू ने बताया कि सामूहिक विवाह समारोह में करीब 20 लाख रुपए का खर्च आता है। चूंकि एक समारोह में 10 लड़कियों का विवाह होता है, ऐसे में यह माना जा सकता है कि हर शादी में करीब 2 लाख रुपए लगते हैं। शादी में लड़कियों को सोने चांदी की सामग्री के अलावा रोजमर्रा का सामान दिया जाता है। कन्यादान के रूप में आने वाला संपूर्ण पैसा सभी जोड़ों में बराबर बांट दिया जाता है। विवाह कराने के लिए न तो कन्या और न ही पुरुष पक्ष से कोई रकम ली जाती है।
लड़की के परिजन खुद ढूंढते हैं रिश्ता
नीतू मौसी ने बताया की वह सिर्फ शादी करवाने की जिम्मेदारी लेती हैं। लड़की के परिजन खुद ही लड़का ढूंढते हैं और लड़के और लड़की का डाक्यूमेंट्स नीतू मौसी के पास दे जाते हैं। जिसका वेरिफिकेशन होता है। जब यह साफ हो जाता है कि उनके पास वास्तव में शादी के लिए पैसा नहीं हैं तो उन्हें शादी करवाने के लिए चुन लिया जाता है।
कुछ लोग भी करते हैं मदद
नीतू मौसी ने बताया वह पूरे साल घर-घर जाकर शादी होने और बच्चे होने की बधाई लेती हैं। उसमें से वह लड़कियों की शादी के लिए पैसे बचाती हैं। हर साल वह नवंबर में ही सामूहिक विवाह करवाती हैं। इसके अलावा जो भी गरीब लड़कियों की शादी में अपनी मदद करना चाहता है, वह मदद करता है, लेकिन इस समारोह के लिए किसी से पैसा मांगा नहीं जाता। कोई मदद करता है तो उसे मना भी नहीं किया जाता। हां, ऐसे बहुत से लोग हैं, जो इस नेक काम में मदद को हर बार आगे आते ही हैं।
किसी भी धर्म की लड़कियों की जाती है शादी
नीतू मौसी ने बताया की वह जब लड़कियों को शादी के लिए चुनती है तो वह किसी का धर्म नहीं देखती। उनके दिमाग में सिर्फ एक बात रहती है कि वह अगर गरीब है तो उसकी शादी नीतू मौसी करवा देगी। इस साल भी तीन मुस्लिम और 7 हिन्दू धर्म के जोड़ों की शादी करवाई गई है।

