बीकानेर में कड़ाके की सर्दी में कांपते बच्चे, लेकिन कलेक्टर को नहीं दिख रही ठिठुरन! स्कूलों की छुट्टी पर प्रशासन मौन

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कड़ाके की सर्दी में कांपते बच्चे, लेकिन कलेक्टर को नहीं दिख रही ठिठुरन!स्कूलों की छुट्टी पर प्रशासन मौन

दैनिक खबरां, बीकानेर। बीकानेर सहित पूरे प्रदेश में कड़ाके की सर्दी और शीतलहर आमजन का जीना मुहाल कर रही है। हालात ऐसे हैं कि सुबह-शाम घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इस जानलेवा ठंड में सबसे ज्यादा प्रभावित वे मासूम बच्चे हैं, जो रोज़ाना तड़के स्कूल जाने को मजबूर हैं।
बीकानेर में बीते कई दिनों से तापमान लगातार लुढ़क रहा है। सर्द हवाओं ने आठ साल के बच्चों से लेकर साठ साल के बुजुर्गों तक को कंपकंपी छुड़ा दी है। बावजूद इसके, जिला प्रशासन और कलेक्टर की संवेदनहीनता चौंकाने वाली है। न तो स्कूलों में अवकाश को लेकर कोई निर्णय लिया गया है और न ही स्कूल समय में बदलाव का कोई आदेश जारी हुआ है।


हैरानी की बात यह है कि एक दिन पहले ही कलेक्टर ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।” सवाल यह है कि क्या शिक्षण व्यवस्था बच्चों की सेहत और जान से भी ऊपर है?
लगातार गिरते तापमान और घनी ठंड में छोटे-छोटे बच्चे भोर में खुले वाहनों, ऑटो और बसों में स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। कई अभिभावक आशंकित हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं। अब सवाल उठता है कि आखिर कलेक्टर मानवीय निर्णय लेने के लिए किस अनहोनी का इंतजार कर रही हैं?
शायद प्रशासन को यह समझने के लिए खुद एक बार सुबह-सुबह बच्चों के साथ स्कूल तक का सफर तय करना होगा। तब जाकर अहसास होगा कि बीकानेर की सर्दी कागज़ी नहीं, हकीकत में जान कंपा देने वाली है।
अब समय आ गया है कि कलेक्टर संवेदनशीलता दिखाते हुए प्राथमिक कक्षाओं में अवकाश और उच्च कक्षाओं के लिए स्कूल समय में बदलाव का तत्काल आदेश जारी करें।
वरना यह सवाल और तेज़ होगा,क्या बीकानेर के बच्चों की ठंड प्रशासन की फाइलों से भी ठंडी पड़ चुकी है?