निगम-बीडीए की लापरवाही से युवक की मौत; कोर्ट ने परिजनों को 10 लाख क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए

बीकानेर

निगम-बीडीए की लापरवाही से युवक की मौत; कोर्ट ने परिजनों को 10 लाख क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए

दैनिक खबरां,बीकानेर।करीब चार वर्ष पुराने एक हादसे में न्यायालय ने नगर निगम और बीडीए (पूर्व में यूआईटी) को गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए मृतक के परिजनों को लगभग 10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। यह मामला राजपूत हॉस्टल के सामने खुले पड़े चैंबर में बाइक सवार युवक के गिरने और बाद में मौत से जुड़ा है।

सत्तासर हाउस निवासी प्रद्युम्नसिंह पुत्र ललितसिंह 19 दिसंबर 2021 की रात करीब 8 बजे एमएन हॉस्पिटल से डीपीएस स्कूल की तरफ जा रहा था। राजपूत हॉस्टल के नजदीक सड़क पर अंधेरा था क्योंकि रोडलाइट बंद थी। इसी दौरान उसकी बाइक का पहिया नगर निगम के खुले व टूटा हुआ पड़े चैंबर में फंस गया। हादसे में वह सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।

हॉस्टल के छात्रों ने उसे तत्काल ट्रोमा सेंटर, पीबीएम अस्पताल पहुँचाया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया। लेकिन अगली सुबह 20 दिसंबर को उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। दोबारा पीबीएम में भर्ती कराने पर इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने इस घटना को नगर निगम और बीडीए की घोर लापरवाही बताते हुए जिला न्यायालय में वाद दायर किया। जिला न्यायाधीश अतुल कुमार सक्सेना ने दोनों विभागों को दोषी ठहराते हुए आदेश दिया कि मृतक के परिवार को 9,99,624 रुपये की राशि 18 अप्रैल 2022 से 7.5% वार्षिक ब्याज सहित दो माह के भीतर अदा की जाए।
इस प्रकरण में परिवादियों की ओर से अधिवक्ता अरुण जोशी ने पैरवी की।

इकलौते कमाने वाले बेटे की मौत से टूटा परिवार
वाद में परिजनों ने बताया कि प्रद्युम्न के पिता ललितसिंह का देहांत पहले ही हो चुका था, ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। वह पढ़ाई के साथ-साथ मॉडर्न मार्केट में सेकंड हैंड मोटरसाइकिल और स्कूटी की खरीद-फरोख्त करता था, जिससे उसे करीब 10 हजार रुपये प्रतिमाह आमदनी हो जाती थी। इसी से वह मां मीनाक्षी कंवर, भाई दीपेन्द्रसिंह, बहन ज्योत्सना राठौड़, दादा महावीरसिंह व दादी सुवाकंवर का खर्च चलाता था।
परिजनों ने न्यायालय में 30 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की मांग की थी। उन्होंने कहा कि अगर सड़क पर प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त होती और चैंबर ढंककर रखा होता तो यह दुर्घटना टाली जा सकती थी।