स्मृति शेष: किसान केसरी डूडी का नोखा से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर,सिने अभिनेता धर्मेंद्र से आए चर्चा में..

नोखा बीकानेर राजनीति राजस्थान

अंतिम यादें: किसान केसरी डूडी का नोखा से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर,सिने अभिनेता धर्मेंद्र से आए चर्चा में..

दैनिक खबरां। रामेश्वर लाल डूडी की राजनीतिक यात्रा 1990 के दशक में शुरू हुई। राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा पंचायत समिति के प्रधान से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले डूडी ने जल्द ही राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। राजनीति में यह दुर्लभ होता है कि कोई नेता इतनी जल्दी ग्रामीण राजनीति से सीधे केंद्रीय राजनीति में प्रवेश करे।

रामेश्वर लाल डूडी को पहली बार 1995 में नोखा पंचायत समिति का प्रधान चुना गया, और वे 1995 से 1999 तक इस पद पर रहे। उनके कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से निकट संबंधों के कारण उन्हें सीधे लोकसभा का टिकट मिल गया। 1999 के लोकसभा चुनाव में डूडी बीकानेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार बने और पहले प्रयास में ही जीत हासिल की। इस जीत के साथ वे गांव की पंचायत से सीधे देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पंचायत तक पहुंच गए।

डूडी ने 1999 से 2004 तक लोकसभा में बीकानेर का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान वे 1999 से 2000 तक लोकसभा की खाद्य, नागरिक आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण समिति के सदस्य भी रहे। उस समय केंद्र में अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार थी।

2004 में डूडी ने एक बार फिर बीकानेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार उनका सामना प्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र से हुआ, जो भाजपा के उम्मीदवार थे। हालांकि डूडी इस चुनाव में हार गए, फिर भी उनका नाम राष्ट्रीय राजनीति में चर्चित हो गया।

राजस्थान विधानसभा चुनाव में डूडी ने 2013 में नोखा निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की, लेकिन 2018 में वे भाजपा के बिहारीलाल बिश्नोई से हार गए। नोखा से चुने जाने के बाद डूडी राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे और उनका कार्यकाल पूरे पांच वर्षों तक रहा।

2022 में डूडी को राजस्थान राज्य कृषि उद्योग विकास बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जो राज्य में कैबिनेट मंत्री के बराबर प्रभाव वाला पद माना जाता है। राजनीति में नई ऊंचाइयों को छूने वाले डूडी के जीवन में अगस्त 2023 में ब्रेन हेमरेज ने अचानक बाधा डाल दी और उनकी सक्रिय राजनीतिक यात्रा वहीं रुक गई। और अंततः 62 वर्ष की उम्र में शुक्रवार देर रात्रि उन्होंने इस दुनियां को अलविदा कह दिया।

रामेश्वर लाल डूडी का जीवन किसानों के हित और जनता की सेवा में समर्पित रहा, और उनकी राजनीतिक यात्रा ग्रामीण राजनीति से लेकर राष्ट्रीय मंच तक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई।