शहर के जिम्मेदारों की लापरवाही से आवारा सांडों की लड़ाई ने ली स्कूटी सवार बुजुर्ग की जान

बीकानेर

शहर के जिम्मेदारों की लापरवाही से आवारा सांडों की लड़ाई ने ली स्कूटी सवार बुजुर्ग की जान


बीकानेर। शहर में आवारा पशुओं के रूप में खुल्लेआम मौत घूम रही है और जिम्मेदार आँखों पर पट्टी बांधे बैठे है मानो उन्हें कुछ नजर ही नहीं आ रहा। जिम्मेदारों की लापरवाही से शहर में आए दिन आवारा पशुओं से हादसों की तस्वीरें सामने आती है। जंहा आमजन गंभीर चोटिल होते है तो कुछ मौत के मुंह में चले जाते है। ऐसी ही एक भयावह हादसे की तस्वीर सामने आई है जंहा इस हादसे में एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान चली गई। घटना लालजी होटल के सामने की है, जहां दो सांडों की लड़ाई में ब्रह्मचर्य आश्रम के पास रानी बाजार निवासी 62 वर्षीय यशपाल पुत्र दौलतराम गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनको परिजनों ने पीबीएम अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां छह जनवरी को ईलाज के दौरान यशपाल की मौत हो गई। ऐसे में सवाल उठता है, इस मौत का जिम्मेदार कौन है? शायद ही किसी के पास इसका कोई जवाब होगा।
दरअसल शहर में जगह-जगह आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा हुआ है। हर दिन भरे बाजार में सांडों की लड़ाई में नुकसान हो रहा है, यहां तक की लोग इस लापरवाही के शिकार हो रहे है। कई बार सांड लड़ते-लड़ते दुकान या प्रतिष्ठान में घुस जाते है। जिससे न केवल नुकसान होता है बल्कि यातायात भी पूरी तरह बाधित हो जाता है। इतना सब होते हुए भी प्रशासन द्वारा इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। पिछले लंबे समय से शहर में आवारा पशुओं को पकड़ा नहीं जा रहा, जिसके कारण शहर में आवारा पशुओं की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। प्रशासन की इस लापरवाही के चलते रानी बाजार निवासी यशपाल शिकार हुए है। इस संबंध में मृतक के पुत्र फ्रैंकी खत्री ने कोटगेट पुलिस थाने में मर्ग रिपोर्ट दर्ज करवायी है। जिसमें बताया कि उसके पिता यशपाल एक्टिवा स्कूटी लेकर लालजी होटल के आगे से जा रहे थे। इस दौरान अचानक आवारा सांड लड़ते हुए स्कूटी पर गिर गए। जिससे उसके पिता को काफी गंभीर चोटें आई। उसके बाद पिता को ईलाज के लिए पीबीएम अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां छह जनवरी को करीब ग्यारह बजे पिता की मृत्यु हो गई। शहर में प्रतिदिन ऐसे हादसे होते है लेकिन इक्का दुक्का ही अख़बारों और न्यूज पोर्टल की हेडलाइन बनते है।