देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला: 50 सीबीआई अफसरों की टीम खंगाल रही कच्चा चिट्ठा,80 हजार फर्जी एकाउंट की हो रही जांच
कुछ साल पहले तक DHFL का विज्ञापन करते आपने बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान को जरूर देखा होगा। जब कोई बड़ा सितारा हमें किसी कंपनी, पेस्ट, तेल या सेवाओं के बारे में बताता है तो हम उस कंपनी पर 100 प्रतिशत भरोसा करते हैं। कई दशकों से ऐसा होता आ रहा है। लेकिन यह DHFL तो फर्जीवाड़े में मास्टर निकली। एक के बाद उसके बड़े-बड़े ‘खेल’ उजागर हो रहे हैं। एक साल पहले पता चला था कि DHFL ने प्रधानमंत्री आवास योजना की मदद से गरीबों को घर देने के नाम पर सब्सिडी डकार ली। जी हां, इस प्राइवेट फाइनेंस कंपनी ने 80 हजार फर्जी अकाउंट खोले, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के फर्जी लोगों को खड़ा किया, उन्हें लोन दिया और सरकार से मिली रियायत खा गए।
बैंकों ने दो किस्तों में करीब 1900 करोड़ की छूट वधावन ब्रदर्स की कंपनी को ट्रांसफर कर दी। मतलब कागजों में बना गरीबों का घर और हकीकत में सब्सिडी पहुंच गई वधावन भाइयों के पास। इसे 14 हजार करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया। यस बैंक के साथ मिलकर भी DHFL ने अंदरखाने भारी उलटफेर किया है। पहले हम 9,000 करोड़, 14 हजार करोड़, 23 हजार करोड़ को बड़ा घोटाला मानते गए लेकिन अब DHFL से ही जुड़ा 34,615 करोड़ का घोटाला सामने आया है।
सीबीआई के 50 अफसरों की टीम खंगाल रही कच्चा चिट्ठा
कंपनी के प्रमोटर रहे कपिल और धीरज वधावन के खिलाफ Bank Fraud का केस दर्ज हो गया है। आरोप है कि कंपनी ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की अगुआई में 17 बैंकों के समूह के साथ 34,615 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। सीबीआई के 50 से ज्यादा अधिकारियों की टीम ने कुछ घंटे पहले आरोपियों के मुबंई स्थित 12 ठिकानों की तलाशी ली है। इससे पहले एबीजी शिपयार्ड का 23,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। वधावन बंधु यस बैंक के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी राणा कपूर के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी हैं।
कैसे हुआ घोटाला
UBI का आरोप है कि कंपनी ने कंसोर्टियम से विभिन्न व्यवस्थाओं के तहत साल 2010 से 2018 के बीच 42,871 करोड़ रुपये की क्रेडिट फसिलिटी ली। लेकिन मई 2019 से भुगतान में डिफॉल्ट करना शुरू कर दिया।
ऑडिट रिपोर्ट
यूबीआई ने दावा किया कि ऑडिट में बड़ी वित्तीय अनियमितताएं, फंड की हेराफेरी, दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा आदि पता चला।
जेल पहुंचे ब्रदर्स
एक समय जिन वधावन ब्रदर्स का प्राइवेट सेक्टर में सिक्का चलता था, आज वे जेल की सलाखों के पीछे हैं। कपिल और धीरज वधावन को मई 2020 में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था। वह केस यस बैंक फ्रॉड से जुड़ा था। पिरामल कैपिटल और हाउसिंग फाइनेंस (PCHF) ने 34,250 करोड़ रुपये में डीएचएफएल का अधिग्रहण कर लिया है।
जांच एजेंसी ने पाया है कि दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन, तत्कालीन चेयरमैन और प्रबंध निदेशक कपिल वधावन, निदेशक धीरज वधावन और रियल्टी क्षेत्र की छह कंपनियां यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह के साथ की गई धोखाधड़ी की साजिश में शामिल थीं।
Source: Navbharat.times

