टिप्पणी: उच्च न्यायालय ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में दोनों साथी एक साथ…..

देश नई दिल्ली

टिप्पणी-

  • अदालत ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को दी जमानत।
  • पूर्व पार्टनर ने जबरन रुपये खर्च कराने का लगाया था आरोप।

नई दिल्ली, @dainikkhabraan। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले युगल में से रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कोई एक साथी खर्च करे या फिर दोनों मिलकर, यह अपराध नहीं होता है।

उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए यह टिप्पणी की है।

जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने अपने फैसले में लड़की की उन दलीलों के सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि आरोपी युवक ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के दौरान उससे सवा लाख रुपये खर्च करवाए थे। उच्च न्यायालय ने कहा कि जब लिव-इन रिलेशनशिप में दोनों साथी एक साथ रहते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि खर्च सिर्फ एक साथी को करना होता है। न्यायालय ने कहा है कि रहन-सहन के लिए खर्च लड़की करे या लड़का, या फिर दोनों ही करें, यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी करते हुए दुष्कर्म के आरोपी युवक राहुल कुशवाहा को जमानत दे दी। न्यायालय ने आरोपी को 25 हजार रुपये के निजी मुचलका और इतनी ही रकम की जमानती जमा करने की शर्त पर जमानत दी है।

जस्टिस गुप्ता ने अपने फैसले में कहा है कि लड़की के बयानों से ही साफ होता है कि वह आरोपी राहुल के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहती थी और दोनों ने शादी के लिए अपने परिवारों को राजी भी कर लिया था। लेकिन दोनों की शादी क्यों नहीं हुई, इसका कारण अबतक नहीं बताया गया।

यह है मामला

पुलिस को दी शिकायत में लड़की ने कहा था कि सितंबर 2017 में वह नौकरी की तलाश में दिल्ली आई थी। यहां पर उसकी मुलाकात राहुल से हुई। दोनों में दोस्ती हुई और वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। लड़की ने आरोप लगाया कि इस दौरान राहुल ने उसपर शादी के लिए अपने माता-पिता को मनाने का दबाव बनाया। अगस्त 2019 में उसके माता-पिता शादी के लिए तैयार हो गए। साथ ही लड़की ने आरोप लगाया था कि इस दौरान उसकी मर्जी के बगैर राहुल ने उससे शारीरिक संबंध बनाए। साथ ही किसी चीज के लिए इनकार करने पर मारपीट भी की थी। लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान सभी खर्च वही वहन करती थी, जो करीब एक लाख 25 हजार रुपये थे।