लव जिहाद कानून पर गुजरात सरकार को झटका
गुजरात, @dainikkhabraan। गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार को लव जिहाद पर अहम फैसला सुनाते हुए राज्य के लव जिहाद कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि लड़की को धोखा देकर फंसाया गया है, तब तक FIR दर्ज नहीं होनी चाहिए।
इससे पहले मंगलवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के सामने दलील दी थी कि राज्य में अंतरधार्मिक विवाह पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन शादी जबर्दस्ती धर्मांतरण का जरिया नहीं बन सकती। हाईकोर्ट शादी के जरिए से जबरन धर्मांतरण से संबंधित नए कानूनों से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इसमें कानून में नए अधिनियम संशोधन को चुनौती दी गई थी।
कानून पर रोक लगाने के लिए याचिका
हाईकोर्ट ने ये फैसला जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर सुनाया है। जमीयत ने इस कानून पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिका पर फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने इस कानून की धारा- 3,4,5 और 6 के संशोधनों को लागू करने पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा, पुलिस में FIR तब तक दर्ज नहीं हो सकती जब तक ये साबित नहीं हो जाता कि शादी जोर-जबरदस्ती से और लालच देकर की गई है।
जबरन धर्म परिवर्तन पर 10 साल तक की सजा
गुजरात में लव जिहाद कानून 15 जून को अस्तित्व में आ गया था। इस कानून के तहत पांच साल की सजा और अधिकतम 5 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। इसे धार्मिक स्वतंत्रता एक्ट, 2003 में संशोधन करके लाया गया है।
पीड़िता नाबालिग तो 7 साल की कैद
गुजरात सरकार ने इस अधिनियम में पीड़िता के नाबालिग होने पर 7 साल तक की कैद और 3 लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान किया है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए भी कम से कम 7 साल की सजा का प्रावधान है।
भास्कर

